- जीवाजी विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में नोडल भारतीय ज्ञान परंपरा तथा प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय द्वितीय राष्ट्रीय कार्यशाला का बुधवार को विभागीय संग्रहालय में समापन हुआ। उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में स्नातकोत्तर इतिहास विषय के पाठ्यक्रम निर्माण पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। कार्यशाला का विषय 'भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेष संदर्भ में' रहा। समापन सत्र की अध्यक्षता जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य उपस्थित रहे। कार्यशाला के आयोजक एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के नोडल अधिकारी तथा प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. शान्तिदेव सिसोदिया भी मंचासीन रहे।
कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कार्यशाला के प्रथम दिन हुए 'बृहत्तर भारत का सांस्कृतिक विस्तार' विषयक उन्मुखीकरण व्याख्यान के प्रमुख बिंदुओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की। उन्होंने विश्वविद्यालय और विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए यहां चल रहे शोध एवं अकादमिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं। डॉ. शान्तिदेव सिसोदिया ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य इतिहास विषय में स्नातकोत्तर प्रथम, द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रम का निर्माण एनईपी-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप करना है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से मुक्त कर भारतीय दृष्टिकोण से तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ भारतीय जीवंत परंपराओं और क्षेत्रीय इतिहास को भी समग्र रूप से शामिल करने पर विचार हुआ। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में विशेषज्ञों और अध्ययन मंडल के सदस्यों से प्राप्त सुझाव उच्च शिक्षा विभाग को भेजे जाएंगे। इन सुझावों के आधार पर आगामी स्नातकोत्तर इतिहास पाठ्यक्रम में आवश्यक विषयों और बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। द्वितीय दिवस विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. मुकेश कुमार मिश्रा, निदेशक, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान भोपाल; डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा जबलपुर संभाग एवं प्राचार्य प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाकौशल महाविद्यालय जबलपुर तथा डॉ. प्रशांत पौराणिक, प्राध्यापक एवं प्राचार्य शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय उज्जैन उपस्थित रहे। केंद्रीय अध्ययन मंडल की चेयरमैन डॉ. श्रद्धा शुक्ला सहित डॉ. मीना श्रीवास्तव, डॉ. भगवत सहाय, डॉ. वंदना गुप्ता, डॉ. रंजना शर्मा व्यास, डॉ. मंजुला निंगवाल, डॉ. सुनीता मालवीय, डॉ. भुवनेश्वर कुमार त्यागी, डॉ. गणेश राम चौहान, डॉ. मानसिंह अजनार और डॉ. मधुसूदन प्रकाश ने भी पाठ्यक्रम निर्माण को लेकर अपने सुझाव दिए। कार्यशाला में फैसिलिटेटर के रूप में डॉ. नवीन गिडीयन एवं डॉ. धर्मेन्द्र तिवारी मौजूद रहे। जीवाजी विश्वविद्यालय के इतिहास मंडल के अध्यक्ष डॉ. रमेश भारद्वाज तथा सदस्य डॉ. मनोज अवस्थी और डॉ. नंदिनी काटजू ने भी सहभागिता की। समापन सत्र का संचालन शोधार्थी प्रिया सुमन ने किया। इस अवसर पर प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला तथा इतिहास अध्ययनशाला के डॉ. अमिता खरे, वैभव शर्मा, राहुल कुमार, आकाश शर्मा, राहुल बरैया, वैशाली गुर्जर, सामिन खान, चांदनी नरवरिया सहित शिक्षक और शोधार्थी मौजूद रहे।