(आरएस दिनकर समाजसेवी)
" राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' भारत की स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का अमर स्वर है, जिसने देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों में भारत भूमि 'मां भारती ' के प्रति समर्पण की भावना जगाई l"
• भारत के संविधान में ' वंदे मातरम्' गीत को स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रगान 'जन- गण- मन ' के बराबर सम्मान मिलाl
° इसकी रचना 'बंकिम चंद्र चटर्जी 'ने 07 नवंबर 1876 में की थी l मातृभूमि की वंदना प्रस्तुत करने वाली राष्ट्र गौरव की अमर रचना 'वंदे मातरम्' कृति 'आनंद मठ' में शामिल किया l
• स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी भारतवासियों का प्रिय गीत बन गया था, इससे राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा लेकर देश को स्वतंत्र कराने के लिए राष्ट्र सपूतों ने कई आंदोलन एवं अभियान छेड़े l
° वस्तुत: यह गीत भारत भूमि की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का गीत बन गया था l
. इसे सुनकर लोग रोमांच और देशभक्ति की भावना एवं राष्ट्र अभिमान से भर जाते थेl
सन 1886 में वंदे मातरम का गायन महाकवि श्री रविंद्र नाथ टैगोर ने किया l
• अंग्रेजों ने 16 अक्टूबर 1905 का बंगाल का विभाजन किया, इसके साथ ही पहले बंगाल और फिर पूरे भारत में 'वंदे मातरम्' का घोष देश में गली, मोहल्लों एवं स्कूलों में भी होने लगा l
° श्री सुभाष चंद्र बोस ने इसे 'इंडियन नेशनल आर्मी' का गीत बना दिया तथा सिंगापुर रेडियो स्टेशन से इसका नियमित प्रसारण किया l
• महर्षि अरविंद जी ने' वंदे मातरम 'का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद भी किया l इन्होंने 'महायोगी' में लिखा है,' वंदे मातरम्' राष्ट्रीयता की अभिव्यक्ति है l
° 'द कैंब्रिज हिस्ट्री ऑफ इंडिया' में कहा गया था कि 'वंदे मातरम्' स्वदेशी अभियान की महान भेंट है l
• 'ए वुकऑफ इंडिया' में श्री वी. एन. पांडे ने लिखा है कि श्री बंकिम चंद्र चटर्जी की इस काव्य रचना ने शीघ्र ही पूरे भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन में अपनी जगह ली l
°° वर्ष 1937 में वंदे मातरम् के पुनरीक्षण के लिए एक उप समिति गठित की गई l कार्य समिति ने इस राष्ट्रीय गीत के प्रथम दो छंद ही गाए जाने का निर्णय लिया l
• भारतीय गणतंत्र की स्थापना के लिए 26 जनवरी 1950 की तिथि निर्धारित की गई l राष्ट्रपति के निर्वाचन से पहले राष्ट्रगान का चयन होना था l 'जन -गण- मन' के मुकाबले यह बैंड संगीत के लिए उपयुक्त नहीं था l इस कारण 'वंदे मातरम्' भारत का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगीत रहेगा तथा राष्ट्रगान की धुन 'जन- गण- मन 'की रहेगी निर्णय लिया गया l
• निष्कर्ष:
°भारत की स्वतंत्रता के संग्राम में ऐतिहासिक योगदान देने वाले गीत 'वंदे मातरम्' को जन -गण- मन के बराबर सम्मान रहेगा l उसे बराबरी का दर्जा प्राप्त रहेगा l
. • हम भारत माता को प्रणाम करते है! वह जो सांवली है,जो सरल है, जो सुंदर मुस्कान से सजी हुई है, जो सबको धारण करने वाली है,जो सबका भरण पोषण करने वाली है l ऐसी भारत भूमि को हम नमस्कार
करते है l * राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को अपनी आवाज देने वाले प्रमुख गायक कलाकारों नें आवास दी- पंडित ओंकार नाथ ठाकुर 15 अगस्त 1947 स्वतंत्रता के अवसर पर आकाशवाणी से इन्होंने 'वंदे मातरम्' सस्वर गायन किया l स्वर कोकिला श्रीमती लता मंगेशकर लता मंगेशकर ने वर्ष 1952 की फिल्म 'आनंद मठ' में गीत को गाकर घर-घर में लोकप्रिय बना दिया l
ए.आर रहमान -इन्होंने 1947 में चर्चित एलवम 'मां तुझे सलाम! के जरिए आधुनिक भारत की युवा पीढ़ी में इस गीत की भावना को पुनर्जीवित किया l दूसरी ओर सोनू निगम, कैलाश खरे, सुनिधि चौहान ने शास्त्री रूप प्रस्तुत किया l
जय हिंद! 'वंदे मातरम'!!