गोकुल के पठठे दाल बाजार के चुनावी समर में कागजी शेर निकले
पंजवानी की गोद में बैठने की चर्चा
ग्वालियर। व्यापार समिति दाल बाजार में पूर्व अध्यक्ष गोकुल बंसल का साया अभी भी हावी है और गोकुल बंसल को अब आम दाल बाजार के व्यापारियों की सहानभूति भी है , लेकिन इसका अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि गोकुल बंसल चुनाव में भागीदारी नहीं कर पा रहे है। वह केवल वोट देंगे और वोट भी उनका तब काउंट होगा जब निर्णायक स्थिति तय करनी होगी। लेकिन वहीं गोकुल बंसल के पठठे कागजी शेर साबित हुये , उन्होंने तमाम लंबेचौडे वायदे व सपने व्यापारियों को दिखाये अब उन्होंने फार्म ही वापस खींचकर पंजवानी समर्थक प्रत्याशियों में नई जान फूंक दी है। पहले दिलीप पंजवानी व उनके सचिव रहे विवेक जैन लिल्ले सांसत में थे।
हालांकि यह तय है कि इस बार गोकुल बंसल व दिलीप पंजवानी के पैनल नहीं लड रहे है। दोनों के समर्थक अपने-अपने बूते पर चुनावी मैदान में है। गोकुल बंसल के जो शेर मनीष बांदिल , महेन्द्र साहू , सुनील गर्ग आये दिन लंबेचौडे दावे कर रहे थे, लेकिन इन्होंने अपने फार्म ही वापस ले लिये। इनमें मनीष बांदिल , महेन्द्र साहू अध्यक्ष पद के लिये थे, तो सुनील गर्ग (अग्रवाल नवयुवक संघ वाले )कोषाध्यक्ष पद के लिये थे।
अब इनके फार्म वापस खींच लिये जाने से दाल बाजार के व्यापारी इन्हें कागजी शेर कह रहे है । जो दिलीप पंजवानी को चुनाव में शह देने की बात कर रहे थे, अब उन्हीं पंजवानी की गोदी में बैठ गये है। केवल दीपक गुप्ता दादा , और श्याम बंसल अप्पा , जो अबकी बार अपनी दम पर चुनावी मैदान में है। पहले यह गोकुल बंसल के पैनल से लडे थे। लेकिन गोकुल बंसल और उनके बढे विरोध के कारण यह अब अकेले अपनी दम पर मैदान में है। और गोकुल बंसल का नाम भी नहीं ले रहे ।
दीपक गुप्ता दादा अध्यक्ष पद और श्याम बंसल अप्पा सचिव मंत्री पद पर है। गोकुल से अलग होने के कारण इनकी मजबूत स्थिति भी बनती जा रही है। जिससे पंजवानी व विवेक जैन लिल्ले चिंतित है।