(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर । जहां सीमित जमीन अक्सर सपनों की सीमा तय कर देती है, वहीं उषा रावत ने सही प्रशिक्षण और मेहनत की बदौलत सीमित भूमि से समृद्धि की नई राह बनाई है। आधुनिक नर्सरी प्रबंधन अपनाकर उषा अब सालाना लगभग 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही हैं।
ग्वालियर जिले के भितरवार विकासखंड के ग्राम निकोड़ी निवासी श्रीमती उषा रावत का परिवार पहले पूरी तरह खेती पर निर्भर था। खेती की कम भूमि के कारण घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई का बोझ उठाना कठिन था। हालात से हार मानने के बजाय उन्होंने बदलाव का रास्ता चुना। आत्मा योजना के अंतर्गत नर्सरी प्रबंधन का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने बीज उपचार, सुनियोजित खेती की तैयारी, सही बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट-रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक विधियां सीखीं और सब्जियों, फूलों व अन्य उपयोगी पौधों की स्वस्थ पौध तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता ने जल्द ही रंग दिखाया। आसपास के किसानों का भरोसा बढ़ा, पौधों की मांग बढ़ी और यह नर्सरी उनके परिवार की आय का स्थायी स्रोत बन गई। लगभग 4 लाख रुपये की लागत लगाकर उन्होंने करीब 10 लाख रुपये की आय अर्जित की, यानि लगभग 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है।
इस आय ने उषा रावत के परिवार का भविष्य संवार दिया है। बड़ी बेटी बी.ए. के बाद एम.एस.डब्ल्यू. कर रही है, बेटा बी.ए. की पढ़ाई कर रहा है और छोटी बेटी कृषि विज्ञान के साथ कक्षा 12वीं में अध्ययनरत है। उषा आज परिवार की आर्थिक गतिविधियों और कृषि संबंधी निर्णयों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी पौध उत्पादन और आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। उषा की सफलता “सेवा संकल्प अभियान” की भावना को भी साकार करती है। यह अभियान शासकीय योजनाओं का मार्गदर्शन गांव-गांव पहुंचाकर किसान परिवारों को आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहा है। उषा रावत अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देती हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लिये किए गए आह्वान से प्रेरित होकर हमने उद्यानिकी अर्थात नर्सरी प्रबंधन अपनाया है। सरकार से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने मुझे नर्सरी प्रबंधन सीखने और सफल होने में मदद की। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। मुझे भरोसा है कि हमारी नर्सरी अन्य किसानों, विशेषकर महिलाओं, को भी आधुनिक कृषि अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देगी।