बुढ़वा मंगल पर डाक्टर हनुमान मंदिर में मेला, 10 लाख लोग आयेंगे
- महामंडलेश्वर रामदास जी ने व्यवस्थायें देखी
ग्वालियर। ग्वालियर से लगभग 70 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध डाक्टर हनुमान मंदिर दंदरौआ में बुढ़वा मंगल 22 सितंबर को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। मंदिर में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुये मंदिर कमेटी व पुलिस प्रशासन व्यापक व्यवस्था कर रहा हैं। आज स्वयं महामंडलेश्वर रामदास महाराज ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने इस प्रतिनिधि में मंदिर में चर्चा में बताया कि श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन हो इसके लिये हमने विभिन्न व्यवस्थाओं के निर्देश दिये हैं। मंदिर में बुढ़वा मंगल को एक गेट से प्रवेश और एक गेट से निकास की व्यवस्था रखी गई है।
डाक्टर हनुमान मंदिर के बारे में जाने
भिंड जिले के मौ कस्बे के पास स्थित दंदरौआ धाम हनुमान मंदिर को डाक्टर हनुमान के रूप में जाना जाता है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा लगभग 600 वर्ष पुरानी है और एक नीम के पेड़ को काटने के दौरान स्वयं प्रकट हुई थी।
मुख्य विशेषताएँ और मान्यताएँः
डॉक्टर और सखी रूपः इस दंदरौआ धाम को दुनिया का पहला ऐसा मंदिर माना गया है जहाँ हनुमान जी डॉक्टर और सखी (गोपी) दोनों रूपों में विराजमान हैं। यहाँ उनके गले में स्टेथोस्कोप (आला) जैसी आकृति दिखाई देती है।
रोगों से मुक्तिः भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से आने और दर्शन करने से कैंसर, टीबी और अन्य गंभीर व लाइलाज बीमारियाँ तथा शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं।
इतिहास और प्रतिमाः यह लगभग 600 साल पुरानी प्रतिमा है जो एक तालाब के पास नीम के पेड़ के अंदर छिपी हुई मिली थी। पेड़ काटने के दौरान आवाज आने पर इसे सुरक्षित निकालकर चबूतरे पर स्थापित किया गया था। यहाँ मूर्ति नृत्य और गोपी मुद्रा में है।
महंत परंपराः यह पवित्र स्थल ब्रह्मलीन महंत बाबा पुरुषोत्तम दास जी महाराज की साधना स्थली रहा है और वर्तमान में यहाँ महामंडलेश्वर संत रामदास जी महाराज के सानिध्य में सेवा कार्य होते हैं।
चमत्कारी भभूतिः यज्ञ और हवन के बाद मिलने वाली भभूति (विभूति) और जल प्रसाद को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इसे घर ले जाने से नकारात्मकता और कलह समाप्त होती है तथा शांति मिलती है।