UPI व्यापारिक लेनदेन पर 15 अक्टूबर से लागू किए गए MDR को वापिस लिया जाए: MPCCI
ग्वालियर । UPI से रु. 2 हजार से अधिक की राशि का भुगतान प्राप्त करने पर व्यापारियों पर लगाए गए MDR का पुरजोर विरोध करते हुए आज म. प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा केन्द्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र प्रेषित कर, नवीन MDR व्यवस्था को पूरी तरह से तत्काल वापिस लिए जाने की माँग की गई है ।
अध्यक्ष-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष-सुरेश बंसल, उपाध्यक्ष-संदीप नारायण अग्रवाल, मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-दीपक पमनानी एवं कोषाध्यक्ष-मनोज अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में UPI ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । पिछले कुछ वर्षों में UPI की सरलता, त्वरितता एवं बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्धता के कारण छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगों तक ने इसे अपने दैनिक कारोबार का अभिन्न हिस्सा बना लिया है, परन्तु भारत सरकार द्वारा आगामी दिनांक 15 अक्टूबर से रु. 2 हजार से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू करने की घोषणा की गई है । इसका प्रत्यक्ष आर्थिक भार देश भर के छोटे-बड़े व्यापारियों पर सीधे पड़ेगा और कम मार्जिन वाला व्यापार इससे ज्यादा प्रभावित होगा । साथ ही, इस कानून की सबसे बड़ी विसंगती यह है कि जो भार मर्चेन्ट पर पड़ रहा है, वह उसे ग्राहक से ले भी नहीं सकता है । वह अतिरिक्त भार उसे स्वयं ही उठाना है, जो कि कारोबारी दृष्टि से अव्यवहारिक होने के साथ-साथ औचित्यहीन भी है क्योंकि वर्तमान समय में व्यापार पहले से ही विभिन्न प्रकार की लागत एवं प्रतिस्पर्धात्मक दबावों से प्रभावित है । इसलिए UPI पर 0.4% MDR लागू होने से प्रत्येक पात्र डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत जुड़ेगी, यह आर्थिक बोझ व्यापारी को ही उठाना है, वह यह लागत ग्राहक से भी वसूल नहीं कर सकता है । इसलिए इस व्यवस्था पर गंभीरता पूर्वक पुनर्विचार कर, इसे तत्काल पूर्ण रूप से वापिस लिए जाने की महति आवश्यकता है ।
पदाधिकारियों ने कहा है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरल एवं कम लागत वाली व्यवस्था रही है । यदि व्यापारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर शुल्क देना पड़ेगा, तो इससे डिजिटल भुगतान के प्रति उत्साह एवं विश्वास प्रभावित होने की प्रबल संभावना है । UPI को भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति का आधार बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि यह केवल भुगतान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश के डिजिटल एवं औपचारिक अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा बन चुका है । इसलिए इसकी लागत संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिससे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहे । साथ ही चेम्बर ऑफ कॉमर्स का स्पष्ट मत है कि भारत में डिजिटल भुगतान को और अधिक मजबूत करने के लिए UPI को व्यापारियों के लिए अधिकाधिक सरल, पारदर्शी एवं कम लागत वाला बनाए रखना, देश के व्यापक आर्थिक हित में होगा ।