दुख में ही भगवान की याद आती है, सुख में भूल जाते हैं: कौशिक
गेरूवाली बगिया त्यागी नगर मुरार में चल रही श्रीमद्भागवत का दूसरा दिन
ग्वालियर। गेरूवाली बगिया त्यागी नगर मुरार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को पं. सतीश कौशिक ने कहा कि कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख नहीं, दुख का वरदान मांगा था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि दुख में तो हमें भगवान याद आते हैं, लेकिन सुख आते ही हम भगवान को भूल जाते हैं। कुंती जानती थीं कि दुख रहेगा तो भगवान का स्मरण बना रहेगा।
भीष्म पितामह के प्रसंग का वर्णन करते हुए पं. कौशिक ने कहा कि द्रौपदी के चीरहरण के समय भीष्म पितामह मौन रहे। सभा में अधर्म होते देखते रहे, जिसका परिणाम उन्हें भोगना पड़ा। इसी मौन की वजह से उन्हें 51 दिन तक बाणों की शैय्या पर कष्ट सहना पड़ा। उन्होंने कहा कि अन्याय के समय मौन रहना भी पाप के समान है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा हमें जीवन में धर्म पर टिके रहने की प्रेरणा देती है। जब-जब धर्म की हानि होती है, भगवान किसी न किसी रूप में रक्षा के लिए आते हैं। भजन-कीर्तन के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा में परीक्षत रामबाबू यादव, रामसिंह यादव,सत्यवती यादव, लोकेंद्र यादव, ओमप्रकाश दीक्षित, विनोद शर्मा, अंकित, गिर्राज अजय यादव, नकुल ढमोले सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजकों ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर बाद आयोजित हो रही है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से भी भक्त पहुंच रहे हैं।