आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में शिक्षक दिवस पर हुआ 14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर का आयोजन
- एआई के दौर में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया हैः डाॅ. मुकुल शरद सुतावने
- तकनीकी और शैक्षणिक विकास के साथ छात्र-छात्राओं में मानवीय संवेदनाओं, रचनात्मकता, कला और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास भी आवश्यक हैः चांसलर श्रीमती रुचि सिंह
- तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, मनुष्य की स्वाभाविक प्रतिभा, भावनात्मक अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकतीः प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान
- शिक्षक केवल ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि छात्र-छात्राओं में जिज्ञासा, सोचने की क्षमता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करते हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
- विभिन्न कैटेगरीज में किया गया शिक्षकों का सम्मान
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में 14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर, आईटीएम ग्वालियर और आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में संस्थान के तुरारी कैंपस स्थित लियोनार्दो द विंची ब्लाॅक के उस्ताद अलाउद्दीन खान सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां विभिन्न कैटेगरीज के अंतर्गत सालभर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों व अन्य सहयोगियों को सम्मानित कर अवार्ड भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. मुकुल शरद सुतावने (डायरेक्टर, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंफाॅर्मेशन टेक्नोलाॅजी (आईआईआईटी) प्रयागराज उप्र) शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह, प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, डीन अकेडमिक डाॅ. रंजीत सिंह तोमर, डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक, आईटीएम ग्वालियर की डायरेक्टर डाॅ. मीनाक्षी मजूमदार, आईटीएम ग्लोबल स्कूल की प्रिंसीपल गीता एस. सहित आईटीएम यूनिवर्स के डीन, विभाग प्रमुख, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षक व एडमिनिस्ट्रेशन स्टाफ मौजूद रहा।
एआई के दौर में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया हैः डाॅ. मुकुल शरद सुतावने
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में शिक्षक दिवस उपलक्ष्य में 14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. मुकुल शरद सुतावने (डायरेक्टर, इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ इंफाॅर्मेशन टेक्नोलाॅजी (आईआईआईटी) प्रयागराज उप्र) ने ‘स्टूडेंट इंगेजमेंट लर्निंग इन द एज आॅफ एआई‘ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास को रोका नहीं जा सकता और न ही रोकना चाहिए, क्योंकि विकास आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मनुष्य का विकसित मस्तिष्क, उसकी रचनात्मकता और कुछ नया करने की क्षमता ऐसी विशेषताएं हैं, जिनके आगे मशीनी उपकरण मनुष्य का स्थान नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं को इस तरह विकसित किया जाए कि वे तकनीक और एआई का उपयोग करने के साथ-साथ अपनी सोचने, समझने और सृजन करने की क्षमता को भी मजबूत रखें। उन्होंने छात्र-छात्राओं को मशीनी उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता से बचाने के लिए शिक्षण पद्धति में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मैने अपनी कक्षा में होम असाइनमेंट देना बंद कर दिया है। इसके स्थान पर मैं छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद करता हूं, ताकि छात्र-छात्राओं की वास्तविक समझ, विचार और समस्याएं सामने आ सकें। इससे शिक्षक, छात्र-छात्राओं की जरूरत को बेहतर ढंग से समझकर उन्हें तथ्यात्मक और उपयोगी समाधान दे सकते हैं।

उन्होंने सीखने के संदर्भ में तीन महत्वपूर्ण स्तरों पर विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया, पहली मनुष्य की शारीरिक एवं बौद्धिक संरचना, दूसरी एआई की संरचना और तीसरी एआई के अनुप्रयोग की सीमा। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को यह समझना जरूरी है कि एआई का उपयोग कहां, कितना और किस उद्देश्य से करना चाहिए और किन कार्यों में अपनी स्वयं की बुद्धि व रचनात्मकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डाॅ. मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं में सोचने, सवाल करने, समस्या का समाधान खोजने और नया सृजन करने की क्षमता विकसित करना होना चाहिए। एआई के दौर में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
तकनीकी और शैक्षणिक विकास के साथ छात्र-छात्राओं में मानवीय संवेदनाओं, रचनात्मकता, कला और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास भी आवश्यक हैः चांसलर श्रीमती रुचि सिंह
14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह ने कहा कि फाउंडर चांसलर श्री रमाशंकर सिंह जी का विजन कभी भी केवल ऐसे इंजीनियर तैयार करना नहीं रहा, जो मशीनी उपकरणों का संचालन करने तक सीमित हों। उनका विजन हमेशा शिक्षित और संवेदनशील समाज तैयार करना रहा है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को समझे तथा कला और संस्कृति केा अपने विकास के साथ जोड़कर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि तकनीकी और शैक्षणिक विकास के साथ छात्र-छात्राओं में मानवीय संवेदनाओं, रचनात्मकता, कला और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज एआई और तकनीक तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रहे हैं, ऐसे में शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं को मानवीय मूल्यों और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के लिए तैयार करना भी होना चाहिए।
तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, मनुष्य की स्वाभाविक प्रतिभा, भावनात्मक अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकतीः प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान
14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज संगीत सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। एआई की मदद से आर्टिफिशियल म्यूजिक तैयार किया जा सकता है, लेकिन उसमें लता मंगेशकर जैसी जीवंतता और मानवीय भावनाओं की गहराई पैदा करना आसान नहीं है। उन्होंने सिंगर एआर रहमान, मल्लिकार्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, मनुष्य की स्वाभाविक प्रतिभा, भावनात्मक अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि एआई मनुष्य को रिप्लेस नहीं कर सकता, बशर्ते हम स्वयं को समय के साथ अपडेट करते रहें। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में तकनीकी बदलाव को समझना और उसके अनुरूप अपनी क्षमताओं को विकसित करना बेहद जरूरी है।
शिक्षक केवल ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि छात्र-छात्राओं में जिज्ञासा, सोचने की क्षमता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करते हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुये भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन के जीवन और उनके शिक्षा के क्षेत्र में योगदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि छात्र-छात्राओं में जिज्ञासा, सोचने की क्षमता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करते हैं। एआई के दौर में तेजी से बदलती तकनीक के बीच स्वयं को अपडेट रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के जिज्ञासु दिमाग को हमेशा नई चीजें सीखने के लिए तत्पर रहना चाहिए और शिक्षकों को भी निरंतर सीखते हुए बदलते समय के साथ अपने ज्ञान एवं कौशल को विकसित करते रहना चाहिए।
विभिन्न कैटेगरीज में किया गया शिक्षकों का सम्मान
शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 14वां डाॅ. एस. राधाकृष्णनन मेमोरियल लेक्चर के दौरान आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर और आईटीएम ग्वालियर के 30 कैटेगरीज में 100 शिक्षकों सम्मानित किया गया। इसी तरह आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर के 8 कैटेगरीज में 8 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित किए गए शिक्षकों को सर्टिफिकेट और विशेष आईकार्ड भी प्रदान किए गए।