ईमानदारी और सच्चाई के सिद्धांत ही वैज्ञानिक रिसर्च की विश्वसनीयता और विकास का आधार: वाइस चांसलर शर्मा
- 20वाँ अनुसंधान में आध्यात्मिकता राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ आयोजन
माउंट आबू। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मुख्यालय माउंट आबू में आयोजित अनुसंधान एवं नवाचार में चेतना का समावेश विषयक सम्मेलन एवं मेडिटेशन रिट्रीट में विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के समन्वय पर गहन विचार-विमर्श हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी प्रगति को मानव कल्याण की दिशा देने के लिए उसमें मानवीय चेतना, मूल्य एवं आध्यात्मिकता का समावेश आवश्यक है।
मुख्य अतिथि, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर प्रतीक शर्मा ने बताया कि रिसर्च में ईमानदारी और सच्चाई के सिद्धांत ही वैज्ञानिक रिसर्च की विश्वसनीयता, भरोसेमंदता और विकास का आधार बनते हैं। वैज्ञानिक कदाचार - जैसे कि मनगढ़ंत जानकारी बनाना, तथ्यों में हेरफेर करना और साहित्यिक चोरी, विज्ञान के लिए एक बड़ा खतरा हैं। ये जनता का भरोसा तोड़ते हैं, सबूतों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं और वैज्ञानिक समुदाय के भीतर ही लोगों को गुमराह करते हैं। हमें बौद्धिक ईमानदारी, रिसर्च की ईमानदारी और वैज्ञानिक कदाचार की अवधारणाओं पर फिर से विचार करने और कदाचार के तीन मुख्य प्रकार तथा उनके नैतिक, शैक्षणिक और सामाजिक महत्व को समझने की ज़रूरत है। हमें विज्ञान की विश्वसनीयता, संस्थान की वैधता और लोगों के कल्याण पर मनगढ़ंत जानकारी बनाने, तथ्यों में हेरफेर करने और साहित्यिक चोरी के असर के बारे में पता होना चाहिए। कार्यक्रम में पद्मश्री उदय विश्वनाथ देशपांडे, मल्लखंब के प्रख्यात प्रशिक्षक एवं “मल्लखंब विश्वगुरु” के रूप में विख्यात, ने कहा कि मल्लखंब केवल खेल नहीं, भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और व्यक्तित्व परिवर्तन का माध्यम हैं| उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को गणित में शून्य, संस्कृत, योगशास्त्र और तक्षशिला जैसी अनेक अमूल्य देन दी हैं। इसी गौरवशाली परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी मल्लखंब भी है।
उन्होंने बताया कि लगभग 50 वर्षों से वे मल्लखंब प्रशिक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और 52 देशों में 5,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि मल्लखंब सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं है और दृष्टिबाधित बच्चे भी इसे सीख सकते हैं। उन्होंने बताया कि मल्लखंब से एकाग्रता, साहस, समन्वय, ग्रहण क्षमता और स्मरणशक्ति जैसी क्षमताओं का विकास होता है। उन्होंने दृष्टिबाधित आई ए एस अधिकारी प्रांजल पाटिल का उदाहरण देते हुए कहा कि मल्लखंब जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बन सकता है। कार्यक्रम में डॉ. कृष्णा मारमशी, डिजिटल ब्रांड एंबेसडर, चेयरमैन विजन डिजिटल इंडिया, फाउंडर चेयरमैन इंपीरियल कॉलेज, वाइस चांसलर ग्लोबल डिजिटल यूनिवर्सिटी, यूएसए तथा फाउंडर चेयरमैन ग्लोबल इकोनॉमिक फोरम, ने कहा कि “आज डेटा से डॉलर बन रहे हैं, अब मानव बुद्धिमत्ता और चेतना से डेटा को दिव्यता की ओर ले जाने का समय” आज विश्व की अर्थव्यवस्था में डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका है और अनेक बड़ी डिजिटल कंपनियां डेटा के माध्यम से आर्थिक शक्ति का निर्माण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल आर्टिफिशल इंटेलीजेंस पर ध्यान देने के बजाय ह्यूमन इंटेलीजेंस को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है। उन्होंने 22 वर्षीय विद्यार्थी द्वारा विकसित AI आधारित तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि मानव बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचार मिलकर बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।
उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के साथ अपने लगभग 40 वर्ष पुराने संबंध का उल्लेख करते हुए विश्व के विभिन्न देशों में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ केंद्रों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक संस्थाओं का कार्य केवल समृद्धि का निर्माण करना नहीं, बल्कि उसका लाभ समाज और मानवता तक पहुंचाना भी है। राजयोगी बी.के. करुणा भाई, सेक्रेटरी जनरल, ब्रह्माकुमारीज़ ने कहा “शिक्षा का लक्ष्य केवल धन कमाना नहीं, जीवन में मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का विकास होना चाहिए” उन्होंने कहा कि आज महिला महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों का सशक्तिकरण भी अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा में अधिक से अधिक धन अर्जित करना कहीं-कहीं प्रमुख लक्ष्य बनता जा रहा है, जबकि जीवन मूल्यों का महत्व कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय शिक्षक केवल शिक्षा नहीं देते थे, बल्कि स्वयं आदर्श जीवन जीकर विद्यार्थियों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करते थे। आज भी शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि श्रेष्ठ जीवन जीने की कला सिखाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय पिछले 90 वर्षों से मूल्य एवं आध्यात्मिक चेतना की शिक्षा देने का कार्य कर रहा है। यह शिक्षा केवल उपदेश पर आधारित नहीं, बल्कि आचरण और जीवन के अनुभव पर आधारित है।उन्होंने प्रकृति के पांच तत्वों का उल्लेख करते हुए मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध की ओर ध्यान आकर्षित किया। तथा प्राकृतिक आपदाओं से सीख लेकर पर्यावरण और जीवन के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया। स्पार्क प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी अंबिका दीदी ने अपने ऑनलाइन सम्बोधन में स्पार्क प्रभाग के राष्ट्रीय सम्मेलन के लक्ष्य और उद्देश्य पर प्रकाश डाला| स्पार्क प्रभाग के राष्टीय संयोजक श्रीकांत भाई ने स्पार्क प्रभाग की सेवाओं से अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी अलका दीदी द्वारा सहज राजयोग ध्यान कराया गया। ध्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को मन की शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराया गया। कार्यक्रम का संचालन रूपेश भाई के द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ कांतिलाल द्वारा किया गया।