आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर द्वारा तीन दिवसीय राजा रवि वर्मा के प्रिंट्स और ओलियोग्राफ्स चित्रों की प्रिदर्शनी का कलावीथिका में हुआ शुभारंभ
- आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर, आईटीएम ग्वालियर और आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर के छात्र-छात्राओं ने संयुक्त रूप से रेड रिबिन कट कर किया चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ
- आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर द्वारा 3 से 6 सितंबर तक कला वीथिका पड़ाव में किया जा रहा है प्रदर्शनी का आयोजन
- चित्र प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, युवाओं और कला प्रेमियों को भारतीय चित्रकला की समृद्ध परंपरा से परिचित और प्रत्यक्ष अनुभव उपलब्ध कराना है
- कला छात्र-छात्राओं में कल्पनाशीलता, अवलोकन क्षमता, रचनात्मक सोच और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की क्षमता विकसित करती हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
ग्वालियर। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के कला संग्रह के अंतर्गत भारतीय कला जगत के महान चित्रकार राजा रवि वर्मा के प्रिंट्स और ओलियोग्राफ्स चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजिन किया जा रहा है। 3 से 6 सितंबर तक तीन दिवसीय चलने वाली इस प्रदर्शनी का शुभारंभ शहर के पड़ाव स्थित कला वीथिका में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर, आईटीएम ग्वालियर और आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर के छात्र-छात्राओं द्वारा संयुक्त रूप से रेड रिबिन कटवा कर किया गया। शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय शामिल हुए। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, डिप्टी रजिस्ट्रार (जनसम्पर्क) श्री अनिल माथुर, एसओईटी डीन डॉ. मुकेश पांडेय, डीन एकेडमिक डॉ. रंजीत सिंह तोमर, आईटीएम ग्लोबल स्कूल से प्रिंसिपल गीता एस., सीएओ रेनू अग्रवाल, कला शिक्षक मुस्ताक खान सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और ग्वालियर शहर के कला रसिक एवं आकाश जाटव, ग्वालियर, आरिफ खान, ग्वालियर, प्रेम प्रजापति, ग्वालियर, प्रांजल राठौड़, मुरैना, जयंत खुराना, ग्वालियर, एरिका गुप्ता, ग्वालियर एवं फरहीन अहमद, ग्वालियर सहित युवाजन उपस्थित रहे।

चित्र प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, युवाओं और कला प्रेमियों को भारतीय चित्रकला की समृद्ध परंपरा से परिचित और प्रत्यक्ष अनुभव उपलब्ध कराना है
कला और शिक्षा के समन्वय की दृष्टि से आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर द्वारा आयोजित राजा रवि वर्मा के प्रिंट्स और ओलियोग्राफ्स चित्रों की इस प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, युवाओं और कला प्रेमियों को भारतीय चित्रकला की समृद्ध परंपरा से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें कला के अध्ययन के लिए एक प्रत्यक्ष अनुभव उपलब्ध करना है। यहीं कारण रहा कि बतौर अतिथि शामिल हुए छात्र-छात्राओं जिनमें आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के छात्र लवकुश गुर्जर (बीटेक एआईएमएल), छात्र राहुल धाकड़ (बीसीए फाइनल ईयर), आईटीएम ग्वालियर के छात्रा दिशा सिंह (सीएसई), छात्र वंशिका सिंह (सीएसई) और आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर से रेजिडेंसियल हेड बाॅय सुखवीर सिंह और जेजिडेंसियल हेड गल्र्स जाह्नवी सिंह के हाथों से रेड रिबिन कट कराकर इस चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया।
राजा रवि वर्मा के प्रिंट्स और ओलियोग्राफ्स चित्रों कोे करीब से देखने का मौका
ख्यातिलब्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा द्वारा तैयार विभिन्न आकारों के उन्हीं की रवि वर्मा प्रेस में छपे करीब 64 ओरिजनल प्रिंट्स और ओलियोग्राफ्स चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन ग्वालियर में पहली बार आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर द्वारा कला वीथिका में आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनी 3 से 6 सितंबर 2026 तक कला वीथिका, पड़ाव, ग्वालियर में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहेगी। जहां कला, शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाल कला रसिक, युवा और छात्र-छात्राएं इन चित्रों का करीब से अवलोकनार्थ आमंत्रित हैं।
कला छात्र-छात्राओं में कल्पनाशीलता, अवलोकन क्षमता, रचनात्मक सोच और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की क्षमता विकसित करती हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
शहर के पड़ाव स्थित कला वीथिका में ख्यातिलब्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा द्वारा तैयार प्रिंट्स और ओलियोग्राफ्स चित्रों की प्रदर्शनी के अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कला का महत्व केवल चित्र बनाने या सौंदर्यबोध विकसित करने तक सीमित नहीं है। कला छात्र-छात्राओं में कल्पनाशीलता, अवलोकन क्षमता, रचनात्मक सोच और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की क्षमता विकसित करती है। इस प्रिंट चित्र प्रदर्शनी के दौरान राजा रवि वर्मा के कार्यों का अध्ययन छात्र-छात्राओं को यह समझने का अवसर भी देता है कि किस प्रकार कलाकार ने भारतीय परंपरा, पौराणिक कथाओं और तत्कालीन समाज को अपनी कलात्मक दृष्टि के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आईटीएम यूनिवर्सिटी द्वारा शिक्षा के साथ कला और संस्कृति को जोड़ने की दिशा में आयोजित यह प्रदर्शनी छात्र-छात्राओं को कक्षा की सीमाओं से बाहर सीखने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर का यह प्रयास कला को अध्ययन, संवाद और अनुभव का माध्यम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।