ग्वालियर में गूंजी कान्हा की भक्ति, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिरों में सजीं भजन संध्याएं
ग्वालियर। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा प्रतिपादित कर्मयोग, सद्मार्ग और लोककल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा श्रीकृष्ण की भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक परंपरा से आमजन को जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ग्वालियर जिले में भी विभिन्न श्रीकृष्ण मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर विशेष श्रीकृष्ण भजन संध्याओं का आयोजन किया गया। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित इन भक्तिमय कार्यक्रमों से ग्वालियर अंचल कृष्णमय हो उठा।
शहर में “श्रीकृष्ण पर्व” के तहत मुरार स्थित द्वारकाधीश मंदिर, संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं रानी लक्ष्मीबाई कॉलोनी स्थित बाबा गंगादास की बड़ी शाला में भी भक्ति संगीत संध्या हुई। दोनों आयोजनों में कृष्ण भक्ति के विविध रंग दिखाई दिए। द्वारकाधीश मंदिर में कार्यक्रम का शुभारंभ हॉकी इंडिया के पदाधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ गायक पंडित उमेश कंपुवाले ने ‘चलो मन वृंदावन की ओर’, ‘राणा जी मैं तो गोविंद के गुण गाऊं’, ‘दरस बिन दुखन लागे नैन’ और ‘जय मीरा के गिरधर’ सहित अनेक भजनों की प्रस्तुति दी। उनकी गायकी में भक्ति के साथ शास्त्रीय संगीत की गहराई भी अनुभव हुई। पंडित कंपुवाले के साथ उनके शिष्यों अजय प्रताप सिंह, हमीर कंपुवाले, रुचि सासोदे, रुचि पराड़कर, सोनिया अग्रवाल और अरुणगीता द्विवेदी ने गायन में संगति की। तबले पर डॉ. मनीष करवड़े, हारमोनियम पर अक्षत मिश्रा तथा कीबोर्ड पर हर्ष भाटिया और कपिल शर्मा ने संगत दी। मंच संचालन अनिकेत तारलेकर ने किया।
सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सीताराम बाथम एवं सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला के महंत पीठाधीश्वर रामसेवक दास महाराज के सानिध्य में आयोजित संगीत संध्या में युवा गायक श्री पीयूष तांबे ने श्रीकृष्ण के भजनों को अपनी भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। ‘बाजे मुरलिया’, ‘वो काला एक बाँसुरीवाला’, ‘ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन’, ‘राधा ऐसी भई शाम की दीवानी’ और ‘जैसे बड़ी तेर भई नंदलाला’ जैसे भजनों ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया। कीबोर्ड पर मुनेन्द्र परिहार और तबले पर पुनीत द्विवेदी ने प्रभावी संगत की। भितरवार के राधाकृष्ण मंदिर में भोपाल से पधारीं सुश्री दीपिका पुरोहित एवं उनके साथियों तथा जबलपुर से आए प्रसिद्ध भजन गायक ईशान मिनोचा एवं उनके साथियों ने कर्णप्रिय भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को कृष्णमय बना दिया। इन आयोजनों की विशेषता केवल भजनों की प्रस्तुति नहीं रही, बल्कि यह रही कि संगीत ने जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव को सांस्कृतिक अनुभव में बदल दिया। एक ओर पंडित उमेश कंपुवाले की प्रस्तुति में शास्त्रीय अनुशासन और मीरा-कृष्ण की विरहभक्ति का स्वर उभरा, तो दूसरी ओर पीयूष तांबे की प्रस्तुति ने लोकप्रिय भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सहज रूप से कृष्ण भाव से जोड़ा।
कार्यक्रमों में उपस्थित श्रद्धालु देर शाम तक भक्ति संगीत में डूबे रहे। एक साथ विभिन्न श्रीकृष्ण मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर आयोजित इन भजन संध्याओं का मूल भाव भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ उनके द्वारा दिए गए कर्म, धर्म, सत्य और सद्मार्ग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा। संगीत और भक्ति के इस सुंदर संगम ने श्रीकृष्ण की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी और आमजन से जोड़ने का कार्य किया। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसरों में गूंजते कृष्ण भजनों और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया।