करोड़ों के गहनों से सजे गोपाल मंदिर के राधाकृष्ण
- भगवान के श्रृंगार दर्शन देखने के लिये उमड़े श्रद्धालु
- कड़ी रही सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीव्ही में कैद रहा मंदिर परिसर
(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर। जन्माष्टमी पर ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में भगवान राधाकृष्ण का बेशकीमती आभूषणों से श्रृंगार किया गया। इन आभूषणों में हीरे, पन्ने, माणिक, पुखराज और नीलम जैसे रत्न जड़े हैं। आभूषणों से सुसज्जित भगवान राधाकृष्ण के दर्शनों के लिये सुबह से ही मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिसका सिलसिला देर रात्रि तक चला। मंदिर में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी और लाइन से ही श्रद्धालुओं को दर्शन के लिये भेजा गया।
फूलबाग चैराहे के पास स्थित गोपाल मंदिर का निर्माण वर्ष 1921 में तत्कालीन ग्वालियर रियासत के शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने कराया था। भगवान की पूजा के लिए उन्होंने चांदी के बर्तन और पहनाने के लिए रत्न जड़ित सोने के आभूषण तैयार करवाए थे। इनमें राधाकृष्ण के लिए तैयार किए गए 55 पन्नों से जड़ा विशेष हार, सात लड़ियों वाला हार, सोने की बांसुरी, सोने की नथ और जंजीर शामिल हैं। चांदी के पूजा के बर्तन भी मंदिर में रखे गए हैं। हर साल जन्माष्टमी पर इन्हीं आभूषणों से भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भगवान के श्रृंगार में सात लड़ियों वाला हार सबसे खास है। इसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हैं। इस एंटीक हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए बताई जाती है। इसके अलावा पन्ने और हीरे से जड़ा मुकुट, सोने की बांसुरी, सोने की नथ, जंजीर और अन्य आभूषण भी भगवान को पहनाए गए। इन आभूषणों में सोना, हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज और नीलम जैसे रत्नों का इस्तेमाल किया गया है।
आजादी से पहले तक ये जेवर भगवान राधाकृष्ण को पहनाए जाते थे। आजादी के बाद सुरक्षा कारणों से इन्हें बैंक लॉकर में सुरक्षित रखवा दिया गया था। साल 2007 में ये आभूषण नगर निगम की देखरेख में आए। इसके बाद से हर जन्माष्टमी पर विशेष समिति की निगरानी में इन्हें बैंक लॉकर से निकालकर मंदिर लाया जाता है। श्रृंगार के बाद इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच वापस बैंक लॉकर में रख दिया जाता है। गहनों से सजे भगवान के स्वरूप के दर्शन के लिए ग्वालियर के अलावा आसपास के क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
शुक्रवार को जन्माष्टमी पर सुबह कड़ी सुरक्षा में लाकर से आभूषणों को निकालकर मंदिर लाया गया, जहां भगवान का इन आभूषणों से श्रृंगार कर मंदिर को आम दर्शनार्थ के लिये खोल दिया गया। करोड़ों रुपए के आभूषणों को देखते हुए गोपाल मंदिर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर में 100 से अधिक जवान तैनात रहे और सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। प्रवेश द्वार पर एएसपी और सीएसपी स्तर के अधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान सम्हाल रखी थी। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मेटल डिटेक्टर से जांच की गई और पूरे परिसर को सीसीटीव्ही कैमरों से कैद रखा गया।