आरजेआईटी में एआईसीटीई-अटल एफडीपी का शुभारंभ, एआई-एमएल से स्मार्ट एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
ग्वालियर। रुस्तमजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आरजेआईटी), बीएसएफ अकादमी ग्वालियर में एआईसीटीई-अटल अकादमी के तहत ‘नोवल मटेरियल, प्रोसेसिंग ऑफ स्मार्ट एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग यूजिंग मशीन लर्निंग’ विषय पर छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों एवं उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग के बढ़ते उपयोग पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में आरजेआईटी के ओएसडी श्री राघवेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि, आईआईटीडीएम जबलपुर के डॉ. हिमांशु शेखर नंदा विशिष्ट अतिथि तथा एसवाईजे रूट्स ट्रेनिंग सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक श्री सोमिल जैन विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में आरजेआईटी के प्राचार्य एवं ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत कुमार जैन ने एफडीपी के विषय, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं उनके निर्धारित सत्रों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को इस अवसर का उपयोग शोध, वास्तविक जीवन की तकनीकी चुनौतियों को समझने और सफलता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एफडीपी समाप्त होने के बाद भी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच शोध एवं अकादमिक सहयोग जारी रहना चाहिए।
श्री सोमिल जैन ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक में तेजी से बदलाव ला रही है। वर्तमान समय में विशेषकर जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोगों के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के साथ एआई एवं मशीन लर्निंग का समन्वय समय की आवश्यकता है।
डॉ. हिमांशु शेखर नंदा, आईआईटीडीएम जबलपुर ने कहा कि शरीर के अंदर उपयोग किए जाने वाले जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोगों के लिए नवीन सामग्री विकसित करना एक बड़ी चुनौती है। डिजाइन तैयार करने के बाद मशीन लर्निंग की मदद से आवश्यक प्रयोगों की संख्या को कम किया जा सकता है, जिससे शोध प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनती है।
मुख्य अतिथि श्री राघवेन्द्र सिंह, ओएसडी-आरजेआईटी ने एफडीपी के आयोजन के लिए डॉ. प्रशांत कुमार जैन एवं प्रो. तृप्ति शर्मा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां राष्ट्र सर्वोपरि हो और शिक्षा एवं शोध के माध्यम से देश की तकनीकी प्रगति में योगदान दिया जा सके।
एफडीपी में आईआईटी दिल्ली, आईआईटीडीएम जबलपुर, आईआईटी इंदौर, एलएनएमआईआईटी जयपुर, बीएआरसी तथा विभिन्न उद्योगों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को नवीन सामग्री, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, मशीन लर्निंग, जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोग, ऑटोमोबाइल सामग्री एवं स्मार्ट विनिर्माण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देंगे। कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी चर्चा एवं अनुभव साझा करने के सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार जैन एवं सह-समन्वयक प्रो. तृप्ति शर्मा हैं। संस्थान के अनुसार एफडीपी का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों को उभरती तकनीकों से जोड़ना तथा शोध, नवाचार और उद्योगोन्मुख तकनीकी कौशल को बढ़ावा देना है।