ग्वालियर। इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अपार उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह जन्माष्टमी बेहद खास होने जा रही है, क्योंकि पूरे 15 साल बाद द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार 4 सितंबर को मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का भी अदभुत शुभ योग का मिलन होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित रमाकांत के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि और रोहिणी नक्षत्र के शुभ योग में हुआ था। अक्सर जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि तो होती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार दोनों एक ही दिन और एक ही समय पर उपस्थित रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में जब तिथि और नक्षत्र के सभी प्रमुख तत्व एक साथ आते हैं, तब श्रीकृष्ण की आराधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस पावन मुहूर्त में व्रत, पूजन और माखन-मिश्री से अभिषेक व पूजन करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर अंचल के सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाएंगे। शहर के फूल बाग स्थित गोपाल मंदिर, कृष्ण मंदिर, गीता प्रेस, खाटू श्याम मंदिर, रामलीला मंदिर और सनातन धर्म मंदिर में भगवान कृष्ण का आकर्षक श्रृंगार और भजन संध्या आदि कार्यक्रम आयोजित होंगे।
कान्हा के जन्मोत्सव के लिए सजे बाजार, झूलों और पोशाकों की बढ़ी मांग
कृष्ण जन्माष्टमी पर्व नजदीक आते ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियों को लेकर मुख्य बाजारों में दुकानें सज गई हैं और लोग खरीदारी के लिए पहुंचने लगे हैं। ग्वालियर में रविवार को अवकाश के दिन महाराज बाड़ा, फालका बाजार, सराफा बाजार, टोपी बाजार, मोर बाजार एवं माधवगंज, हजीरा तथा मुरार बाजार में अच्छी खासी रौनक देखने को मिली। ग्वालियर के प्रमुख बाजारों में इस बार कान्हा जी के लिए आकर्षक झूले, रंग-बिरंगी पोशाकें, मुकुट और मोर पंख वाली टोपियां विशेष रूप से सजी हैं। दुकानदारों ने छोटे-बड़े झूलों को फूलों, मोतियों और झालरों से सजाकर रखा है। इनकी कीमत 150 रुपये से लेकर 800 रुपये तक है। साथ ही लड्डू गोपाल व बाल गोपाल की पीली, केसरिया और गुलाबी पोशाकें भी खूब बिक रही हैं। दुकानदारों के अनुसार, इस बार 15 साल बाद बन रहे दुर्लभ संयोग के कारण ग्राहकी पिछले साल से ज्यादा है। महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से कान्हा जी के श्रृंगार का सामान पसंद कर रहे हैं। शाम होते ही बाजार में भीड़ बढ़ जाती है।