भारत रक्षा मंच के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक सूर्यकांत केलकर ने देश में हिंदुओं पर हमले की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं । उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से सरकारों की धर्म निरपेक्षता की नीति और मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण हिंदू समुदाय खुद को दबा हुआ महसूस करता रहा और उसमें असुरक्षा एवम् भय की भावना व्याप्त हो गई , जिससे वह अन्याय का प्रतीकार करने में भी संकोच करने लगा।
श्री केलकर अहमदाबाद में भारत रक्षा मंच की कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने के बाद सूरत के वैष्णोदेवी टाउनशिप में आए थे ,
जहां उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों से मुलाकात की । इनमें प्रमुख थे - भारत रक्षा मंच के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष भगवान झा एवं उपाध्यक्ष नितीन राणा , जी एस टी कमिश्नर- सूरत- डी आर रेवाला , कपड़ा व्यापारी दीपक भाई के दूधवाला, हितेंद्र एज दवे, हेमांशु मेहता , निसर्ग मेहता और महिलाओं में जिग्निशा बेन,सेजल बेन और ममता बेन तथा न्यूज 24 से पत्रकार राजीव त्रिवेदी , दस्तक दर्पण के संवाददाता लल्लन बिंद, कर्णावती से संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता अनिल भाई रामचंद्र गौर ।
श्री केलकर ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि हिन्दू समुदाय को अपने पर हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए संगठित होकर सामने आना होगा । उन्होंने कहा कि क्या वजह है कि चैंपियंस ट्रॉफी में भारत द्वारा न्यूजीलैंड पर जीत हासिल करने के बाद मध्य प्रदेश के महू में जीत की खुशी मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम की एक भीड़ हमला कर देती है । उन्होंने कहा कि
इस तरह की घटनाएं आम हो गईं है फिर चाहे वह नागपुर हो या बहराइच , सम्भल हो या देश का कोई अन्य भाग । श्री केलकर ने कहा कि जब भी मुस्लिम क्षेत्रों से हिंदुओं की शोभा यात्राएं निकलती है तो उन पर पथराव की घटनाएं हो जाती हैं जबकि हिंदुओं के क्षेत्रों से मुस्लिम समुदाय के जुलूस निकलने पर कभी ऐसा देखने में नहीं आता । मुस्लिम इलाको को संवेदनशील क्षेत्र बताया जाता है और वहां से हिन्दू समुदाय की शोभा यात्राओ को गुजरने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है । ऐसा कब तक चलता रहेगा ?
जनसंख्या नियंत्रण के सवाल पर श्री केलकर ने कहा कि मुस्लिमों के कारण भारत पर जनसंख्या का दबाव है जिसे सरकार को नियम बनाकर रोकना होगा अन्यथा भारत के संसाधन पर जो बुनियादी हक हिंदुओं का है वह मुस्लिम तुष्टिकरण में ही चला जाएगा ।
हालांकि अब हिंदू मुखर हो रहा है और अपनी बात को अधिकारपूर्वक मजबूती से रख रहा है ।
अब समय आ गया है कि देश के सभी हिंदू संगठन मिलकर सरकार के समक्ष हिन्दू राष्ट्र की मांग रख़ें ।