किसी व्यक्ति की बजह से अपनी खुशी और शांति को न जाने दें - प्रहलाद भाई

जिला न्यायालय में अभिभाषकों के लिए पीस ऑफ माइंड एण्ड मेडिटेशन विषय पर हुआ कार्यक्रम
ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय की भगिनी संस्था राजयोग एज्युकेशन एण्ड रिसर्च फाउंडेशन के न्यायविद विंग द्वारा आज उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ ग्वालियर के सहयोग से आज अभिभाषकों के लिए पीस ऑफ माइंड एण्ड मेडिटेशन विषय पर कॉमन हॉल जिला न्यायालय में कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, वरिष्ठ ध्यान प्रशिक्षक एवं मोटिवेशनल स्पीकर बीके प्रहलाद भाई, बीके पवन उपस्थित थे।
कार्यक्रम के शुभारंभ में बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि आज की भागती दौड़ती जिंदगी में यदि खुशी और शांति का अनुभव करना है तो थोड़ा समय प्रतिदिन अपने लिए अवश्य निकालना होगा।
आज हमने खुशी का आधार व्यक्ति, वस्तु या बैभवों को बना दिया है जबकि खुश रहना और शांत रहना हमारा मूल स्वभाव है।
आज हमसे कोई खुश होकर बात न करे या शांति से बात न करे तो बहुत दुखी हो जाते है और हमको लगता है हम इनकी बजह बहुत दुखी है और हम सभी को यह कहते भी है। इसका मतलब यह है कि अपने सुख की चाबी दूसरों को दे दी है।
हम जिनसे खुशी, शांति, प्रेम की आस कर रहे है और उनसे नहीं मिल रही है इसका मतलब है कि वह भी खाली है। और खाली व्यक्ति दूसरे खाली व्यक्ति को क्या दे सकता है। इसलिए जो चीज जीवन में चाहिए वह अपने मे लायें और फिर दूसरों को बाँटे तो आपके पास और बढ़ जाएगी। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है राजयोग ध्यान। जिसमें हम अपने मन की तार सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा से जोड़कर अपने को ज्ञान, गुण और शक्तियों से भर सकते है। प्रतिदिन थोड़ा समय मेडिटेशन या धयान करें और अपने जीवन मे शांति की अनुभूति करें। इसके साथ ही उन्होंने जीवन को खुशनुमा बनाने के लिए कुछ टिप्स भी दिए।
- रोज सुबह जल्दी जागें
- शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए पैदल चलें या व्यायाम करें।
- प्रकृति के संपर्क में रहें।
- दिन की शुरुवात सकारात्मक चिंतन से करें।
- प्रतिदिन राजयोग ध्यान का अभ्यास अवश्य करें।
- हमेशा दूसरों की विशेषताएं देंखें।
- ऑफिस का तनाव घर पर लेकर न जाएं।
- अगर किसी के साथ कुछ मन मुटाव हो जाए तो सोने से पहले संबंधित को फोन कर बात करें।
- ईश्वर का धन्यवाद करें।
- दूसरों को क्षमा करने की आदत डालें।
- जीवन अनमोल है उसका आनंद लें। 
- किसी व्यक्ति की बजह से अपनी खुशी और शांति को न जाने दें।

कार्यक्रम में राजयोगिनी आदर्श दीदी ने सभी को राजयोग ध्यान के बारे में बताते हुए कहा कि हम सभी के अंदर एक चैतन्य शक्ति होती है जो शरीर को चलाती है। जिसे हम आत्मा कहते है। मन, बुद्धि, संस्कार आत्मा की तीन शक्तियां है। वह किस तरह से कार्य करती है उसके बारे में बताया तथा अंत में सभी को राजयोग ध्यान की गहन अनुभूति भी कराई।
इस अवसर पर अभिभाषक संघ अध्यक्ष पवन पाठक, उपाध्यक्ष जितेंद्र दीक्षित, सचिव महेश गोयल, एडवोकेट राजेश मित्तल, अनिल शर्मा, पवन शर्मा, सुनील राजपूत, रवि कुशवाह, जितेंद्र सिमरोदिया, दिलीप सिंह यादव, ज्ञानेन्द्र कुमार, सीपी सिंह, सुनीता चौहान, संजय खेड़कर, पूजा सिसोदिया, अवधेश सिंह तोमर, संतोष शर्मा, सुमित सिंह राजावत, अक्षय सिंह राजावत, उमेश राजोरिया, विवेक शर्मा, रमेश गोस्वामी, राहुल चौरसिया सहित अनेकानेक एडवोकेट उपस्थित थे।

नोट- कल 4 अप्रैल को शाम 4 बजे उच्च न्यायालय में अभिभाषकों के लिए मेडिटेशन विषय पर होगा कार्यक्रम।

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