बैंकों के एटीएम खराब, कैश नहीं रहता: बैंक प्रबंधन केन्द्र सरकार को दिखा रहे ठेंगा
अजय शर्मा
ग्वालियर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर केन्द्र की सरकार जहां डिजिटल लेन देन पर जोर दे रही है वहीं बैंकों की भीड को कम करने बैंकों ने प्रत्येक ग्राहक को एटीएम की सुविधा प्रदान की है। लेकिन बैंक प्रबंधन की लापरवाही और अधिकारियों की दूर दर्शिता नहीं होने से महानगर में अधिकतर बैंकों के एटीएम या तो खराब पडे हैं या उनमें कैश समय पर नहीं भरे जाने से ग्राहक परेशान हो रहे है। लेकिन बैंक अधिकारी है कि वह अपना कर्तव्य पूरा नहीं करते हैं और ग्राहक परेशान होकर एक दूसरे एटीएम के चक्कर लगाते रहते है।
बैंकों द्वारा महानगर में कई स्थानों पर अपने एटीएम लगाए है। इसके लिए बैंक द्वारा एटीएम लगाने वाले स्थान का उचित किराया भी संबंधित को भुगतान किया जाता है। इन सबके बाद भी बैंक परिसर में भी एटीएम लगाये गये है। ऐसे में प्रबंधन की लापरवाही या फिर कैश भरने वाली एजेंसी को समय पर कैश नहीं देने से महानगर में 15 तारीख से लेकर 30 तारीख के बीच में अधिकतर बैंकों के एटीएम खाली रहते है। इतना ही नहीं भारतीय स्टेट बैंक से लेकर पंजाब नेशनल बैंक ने अपने कई एटीएम को बंद कर दिया है। वहीं उसके पास के एटीएम खाली होने से लोग परेशान होकर एक एटीएम से दूसरे एटीएम की तरफ चक्कर लगाने मजबूर होते है।
बैंक सूत्र बताते हैं कि बैंकों ने एटीएम तो कई स्थानों पर लगवा दिये हैं लेकिन उनका रख रखाव ठीक ढंग से नहीं हो पाने के चलते कई एटीएम में समय पर कैश नहीं डाला जा पा रहा है । सूत्र बताते हैं कि कई बार कैश भरने वाली एजेंसी को भी समय पर पैसा नहीं मिलने से वह भी कुछ बाहर के एटीएम और महानगर के एटीएम खाली रहते है। वहीं एटीएम को ठीक करने वाली एजेंसी के भी कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं होने और उसके उपकरण भी तत्काल नहीं मिलने से कई एटीएम कई दिनों तक खराब पडे रहते है।
सूत्र बताते हैं कि वैसे एटीएम में कितना कैश है इसकी जानकारी आन लाइन बैंक प्रबंधन के पास रहती है फिर भी प्रबंधन द्वारा समय पर कैश भरने के लिए नहीं मिलने से वह भी एटीएम को वैसे ही छोडने को मजबूर हो जाता है। और बैंक के ग्राहक अपना पैसा निकालने के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम की ओर चक्कर लगाते रहते है।