देशभर के व्यापारियों का UPI MDR पर विरोध
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए नियम, जिसमें 2000 रुपये से अधिक के P2M UPI भुगतान पर दुकानदार से 0.4% MDR वसूला जाएगा, का हम पुरजोर विरोध करते हैं।
*हमारा सीधा सवाल है - जब घाटा किसी को नहीं तो वसूली किस बात की?*
शासकीय आंकड़ों के अनुसार देश के बैंक 4 लाख करोड़ रुपये और NPCI 1900 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। जब पूरा सिस्टम पहले से मुनाफे में है, तो छोटे दुकानदारों से ये नई वसूली क्यों?
बुक पब्लिशिंग और चाय जैसे व्यापार में हमारा शुद्ध मुनाफा 0.25% से 2% है। वहां 0.4% MDR देना मतलब सीधा घाटा। इस पर 18% GST और लगेगा तो असली लागत 0.472% हो जाएगी।
इसका मतलब साफ है - ये वसूली अंत में ग्राहक से ही होगी।
सरकार कहती है 96% लेनदेन फ्री रहेंगे, पर एक किताब के 2500 रुपये के ऑर्डर पर भी हमें 11.80 रुपये की चोट लगेगी। और जो व्यापारी GST छूट में हैं, उन्हें ITC भी नहीं मिलेगा।
सरकार हमें दुधारू गाय समझना बंद करे।
हम यही बात माननीय न्यायपालिका में भी उठाएंगे। यदि यह निर्णय वापस नहीं हुआ तो सरकार को देशभर के व्यापारियों के लोकतांत्रिक विरोध का सामना करना पड़ेगा।
सुनील अग्रवाल सनी
बुक पब्लिशर एवं चाय व्यापारी