अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने प्रशासन को चेताने के लिये दिया ज्ञापन
ग्वालियर । सम्राट मिहिरभोज की जाति संबंधित विवाद की वजह से एक बार फिर शहर की पुलिस एंव प्रशासन परेशानी में पड़ता दिख रहा है । अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा तथा अन्य क्षत्रिय संगठनों ने संभाग आयुक्त कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष इं. राजेंद्र सिंह भदौरिया , सुरेन्द्र सिंह तोमर, रामकुमार सिंह सिकरवार, बृजपाल सिंह तोमर, रमेश सिंह भदौरिया एवं गोपाल सिंह तोमर के नेतृत्व में संभागीय आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा क्षत्रिय समुदाय ने माँग की कि उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण 25722/2021 में उच्च न्यायालय द्वारा बनायी गयी समिति के माध्यम से सही तथ्य एवं सटीक जानकारी न्यायालय तक पहुंचाई जाये।
क्षत्रिय महासभा ने माँग की कि ग्वालियर नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज के नाम के आगे नियम विरुद्ध एक जाति विशेष का नाम अंकित करने पर विघिसंमत दंडात्मक कार्यवाही की जाये। क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधि एडवोकेट एम. पी. सिंह ने बताया कि गुर्जर समाज की अगुवाई कर रहे विधायक पर विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज होकर माननीय जिला एंव सत्र न्यायालय ग्वालियर से वारंट जारी किया हुआ है फिर भी संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित बैठक जिसमे पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर उपस्थित थे।इस बैठक में वारंटी विधायक पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में खुलेआम शामिल हुआ जिससे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा बनायी गई समिति के उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लग गया इसका घटना कीं क्षत्रिय समाज कढा विरोध करता है।
इं. राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया शासकीय स्थल पर , शासकीय कोष से शासन के द्वारा मूर्ति स्थापित की गई है जिसके शिलालेख पर किसी जाति विशेष का उल्लेख करना पूर्णतया अनुचित है।सुरेन्द्र सिंह तोमर जी द्वारा उपस्थित क्षत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक वर्ग विशेष के अधिकारी जो कि पदेन समिति के सदस्य भी है गुर्जर समाज को अनुचित लाभ प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। क्षत्रिय समूह ने एक बार फिर दोहराया कि हमें क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज की मूर्ति पर लगे शिलालेख मे ग्वालियर नगर निगम से पारित ठहराव में उल्लेखित ‘ सम्राट मिहिरभोज’ के अलावा कुछ भी मंज़ूर नहीं है।
क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री ललित सिंह तोमर ने कहा कि जिन इतिहासकारों ने उक्त विषय पर शोध किया है उन्हीं इतिहासकारों से ऐतिहासिक तथ्य लिए जायें।यदि सम्राट मिहिरभोज की जाति को बदलने के लिये समिति की रिपोर्ट में सत्यता की अनदेखी की गयी तो तो क्षत्रिय समाज सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ेगा। ञापन देने वालों में अतर सिंह तोमर, महेन्द्र सिंह तोमर , भंवर सिंह जादौन, रघुराज सिंह तोमर, बलवीर सिंह तोमर, राजकिरण सिंह भदौरिया, अशोक सिंह तोमर, रणवीर सिंह सिकरवार, मौहर सिंह जादौन, विष्णु प्रताप सिंह भदौरिया, वी पी सिंह तोमर , जितेंद्र सिंह राजावत, सुखवीर सिंह तोमर, श्याम सिंह तोमर, जितेंद्र सिंह भदौरिया, अरविंद सिंह तोमर, सुधीर सिंह चौहान, जन्मेजय सिंह तोमर, गौरव राजावत आदि शामिल है।