ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेकर नई उड़ान पर निकले एबीवी-आईआईआईटीएम ग्वालियर के 360 उपाधिधारक

सप्तम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा– "ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए"; विशिष्ट अतिथि प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला ने नवाचार आधारित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर दिया बल
*ग्वालियर,। ज्ञान, परिश्रम, अनुशासन और उपलब्धियों के उत्सव का साक्षी बना अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (ABV-IIITM), ग्वालियर का सप्तम दीक्षांत समारोह (27वाँ उपाधिधारक बैच) शनिवार को संस्थान के कन्वेंशन सेंटर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह समारोह केवल उपाधियों के वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को नवाचार, नैतिक नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए समर्पित जीवन जीने का प्रेरणादायी संदेश भी दे गया। समारोह की निर्धारित कार्यवाही में अकादमिक शोभायात्रा, दीप प्रज्ज्वलन, निदेशक का स्वागत उद्बोधन एवं प्रगति प्रतिवेदन, उपाधिधारकों की शपथ, विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य अतिथि के संबोधन, उपाधि वितरण, पदक एवं प्रमाण-पत्र वितरण तथा धन्यवाद ज्ञापन सम्मिलित रहे। 
समारोह में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि तथा मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. श्री निवास सिंह ने की। समारोह में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, सीनेट सदस्यों, शिक्षकों, अधिकारियों, पूर्व छात्रों, अभिभावकों तथा देश के विभिन्न भागों से आए गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस अवसर को ऐतिहासिक बना दिया। 
संस्थान की उपलब्धियाँ केवल आँकड़े नहीं, सामूहिक संकल्प का परिणाम हैं : प्रो. श्री निवास सिंह
अपने स्वागत उद्बोधन एवं वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. श्री निवास सिंह ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी विद्यार्थी के शैक्षणिक जीवन का समापन नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसकी नई जिम्मेदारियों का प्रारम्भ है। उन्होंने कहा कि आज जिन विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जा रही हैं, वे केवल डिग्रीधारक नहीं हैं, बल्कि ऐसे युवा हैं जिन पर भविष्य के भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक प्रगति का दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उपाधिधारक को यह स्मरण रखना चाहिए कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
संस्थान की राष्ट्रीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एबीवी-आईआईआईटीएम ग्वालियर ने एनआईआरएफ इंजीनियरिंग रैंकिंग 2025 में 96वाँ तथा प्रबंधन श्रेणी में 93वाँ स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त अन्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मूल्यांकन संस्थाओं द्वारा भी संस्थान को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहा गया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियाँ किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे संस्थान परिवार के सामूहिक समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्टता की संस्कृति का परिणाम हैं।
प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष विद्यार्थियों को देश एवं विदेश की अग्रणी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हुए। ₹1.17 करोड़ के सर्वोच्च वार्षिक पैकेज तथा लगभग ₹28.85 लाख के औसत वार्षिक पैकेज ने यह सिद्ध किया है कि संस्थान के विद्यार्थी वैश्विक उद्योगों की अपेक्षाओं पर पूर्णतः खरे उतर रहे हैं।
अपने संबोधन के अंत में प्रो. सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि वे जीवन में चाहे जिस क्षेत्र में जाएँ, ईमानदारी, संवेदनशीलता, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों को कभी न छोड़ें। उन्होंने कहा कि तकनीकी उत्कृष्टता तभी सार्थक है जब उसके साथ चरित्र की उत्कृष्टता भी जुड़ी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी मातृसंस्था से सदैव जुड़े रहें और अपने ज्ञान एवं अनुभव से समाज तथा देश के विकास में निरंतर योगदान देते रहें।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने अपने प्रेरणादायी दीक्षांत उद्बोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का भी अवसर है कि शिक्षा ने हमें किस प्रकार का इंसान बनाया है। उन्होंने कहा कि एक उत्कृष्ट तकनीकी विशेषज्ञ बनने से भी अधिक महत्वपूर्ण है एक उत्कृष्ट नागरिक बनना। आज का भारत ऐसे युवाओं की अपेक्षा करता है जो ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, विज्ञान के साथ मानवीय दृष्टिकोण तथा सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कम्प्यूटिंग, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, डेटा विज्ञान तथा डिजिटल परिवर्तन आने वाले दशकों में विश्व की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था और सामाजिक जीवन को नई दिशा देंगे। ऐसी परिस्थितियों में केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। निरंतर सीखते रहना, स्वयं को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना तथा जिज्ञासु बने रहना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन में तीन मूलभूत सिद्धांत सदैव स्मरण रखने चाहिए—ईमानदारी, उत्कृष्टता और करुणा। यदि ज्ञान के साथ नैतिकता नहीं जुड़ी, तो तकनीकी प्रगति भी मानवता के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए प्रत्येक तकनीकी विशेषज्ञ का दायित्व है कि वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग समाज के व्यापक हित में करे।
समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व आज चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रहा है और भारत इस परिवर्तन का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि देश के तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी केवल भविष्य के इंजीनियर नहीं हैं, बल्कि वे भविष्य के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्यमी तथा परिवर्तन के वाहक हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान विकसित करना है। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, साइबर सुरक्षा तथा ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. शुक्ला ने कहा कि अनुसंधान तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता जब तक उसका लाभ समाज तक न पहुँचे। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे प्रयोगशालाओं में विकसित विचारों को उद्योग, स्टार्टअप तथा सामाजिक नवाचार के माध्यम से जन-कल्याण में परिवर्तित करें।
दीक्षांत समारोह का सर्वाधिक गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से उपाधियाँ प्रदान की गईं। समारोह में कुल 360 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 75 बी.टेक. (कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग), 111 इंटीग्रेटेड बी.टेक.-एम.टेक., 36 इंटीग्रेटेड बी.टेक.-एम.बी.ए., 42 एम.टेक., 44 एम.बी.ए., 20 पीएच.डी. तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत 32 बी.टेक. (आईटी) लेटरल एग्जिट उपाधियाँ सम्मिलित थीं। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 70 छात्राएँ भी शामिल रहीं, जिन्होंने तकनीकी एवं प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट उपलब्धियों से संस्थान का गौरव बढ़ाया। 
इसके पश्चात मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि ने विभिन्न कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को संस्थान स्वर्ण पदक, सीताराम जिंदल स्वर्ण पदक, गुजरा सिंह स्मृति स्वर्ण पुरस्कार, क्यूसीएफआई पर एक्सीलेंस अवार्ड तथा प्रमाण-पत्र (Certificates of Merit) प्रदान कर सम्मानित किया। पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। यह क्षण विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों के लिए भी अत्यंत भावुक और गर्व का अवसर बन गया।
संस्थान द्वारा प्रकाशित "Hall of Fame–2026" में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इन विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता, नेतृत्व क्षमता तथा समग्र व्यक्तित्व विकास के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। 
_की क्षमता का प्रमाण है।
दीक्षांत समारोह ने दिया उत्तरदायी नागरिक बनने का संदेश
पूरे समारोह का मूल संदेश केवल शैक्षणिक सफलता तक सीमित नहीं रहा। निदेशक, मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि—तीनों वक्ताओं ने अपने विचारों में एक समान संदेश दिया कि तकनीकी उत्कृष्टता का वास्तविक महत्व तभी है जब वह समाज, राष्ट्र और मानवता के हित में प्रयुक्त हो।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, समावेशी विकास, तकनीकी नवाचार और राष्ट्र निर्माण के लिए भी करें। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो निरंतर सीखते रहेंगे, नई चुनौतियों को स्वीकार करेंगे तथा विज्ञान और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। दीक्षांत समारोह का समापन एक संदेश के साथ हुआ—"उपाधि सफलता का अंत नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और समाज सेवा के नए अध्याय का शुभारंभ है।"

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