अटल जी के व्यक्तित्व की विराटता जितनी दिखाई देती थी वे उतने ही सरल और सहज थे: जयभान सिंह पवैया

ग्वालियर  भारतीय जनता पार्टी भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी के जन्म शताब्दी समारोह के तहत मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर महानगर की जिला एवं मंडल टोली के साथ उनकी स्मृतियों को ग्वालियर पूर्व विधानसभा के पं दीनदयाल मंडल के भगतसिंह नगर में निवासरत भारतीय जनता पार्टी वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री एवं महाराष्ट्र के सह प्रभारी जयभान सिंह पवैया ने श्रद्धेय अटल जी के साथ बीते हुए ऐतिहासिक पलों को भारत रत्न श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेई जन्म शताब्दी समारोह की जिला एवं मंडल टोली के साथ में  उनकी यादों को साझा किया। इससे पूर्व वरिष्ठ नेता का अंगवस्त्र पहनाकर उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर श्रद्धेय अटलजी को याद करते हुए पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने बताया कि श्रद्धेय अटलजी से मेरा परिचय यानी उनका सानिध्य मुझे राजनीति में तो 1997 के आखिरी से जुड़ा है। लेकिन जब मैं गैर राजनीति क्षेत्र में काम करता रहा।  अखिल  भारतीय विद्यार्थी परिषद में तो  विश्व  हिंदू परिषद के समय उनका सानिध्यमुझे प्राप्तहुआ। अटल जी के साथ संस्मरण में मैं इतना कहूंगा कि श्रद्धेय अटलजी का व्यक्तित्व जितना विराट दिखाई देता था एक राजनेता के रूप में वह प्रधानमंत्री भले ही बाद में बने हो लेकिन उनका औहदा बहुत बड़ा था। इतने बड़े औहदे वाले राजनेता के सामने मिलते समय शायद हम अपने मन की बात ना कर पाए कुछ दूरी बनी रहे लेकिन मेरी उनसे बार-बार मुलाकात होती थी जब मैंने उनसे कहा कि मुझे आपसे मिलना है तो उनकी तरफ से कभी भी ना नहीं होती थी। ग्वालियर का होने के नाते उनका स्नेह हमेशा परिवार की तरह मेरे ऊपर रहता था। मुझे लगता था कि जितनी विराटता उनके व्यक्तित्व की दिखाई देती थी हिमालय की तरह लेकिन जब उनके नजदीक बैठते थे तो वे उतने ही तरल, सरल और सहज दिखाई देते थे। शायद यही चीज उनको महान बनाती है।  उन्होंने बताया कि 1996 में जब हिजमुल मुजाहिदउद्दीन नामक आतंकी संगठन ने धमकी दी कि अमरनाथ की यात्रा हिंदुस्तान में नहीं होने देंगे। उस समय में बजरंग दल का प्रमुख था। तब मैंने संगठन से अनुमति ली और 50000 युवाओं को लेकर घाटी में आ रहा हूं देखता हूं कौन मायका लाल मुझे रोकेगा, रोक कर दिखाएं उसके बाद यात्रा हुई और प्रकृति नियम से कुछ श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई तब क्या हुआ कि दिल्ली के ताल कटोरा में श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि सभा होनी चाहिए और आतंकियों के कुकृत्य पर कुछ बोला जाए।  उस सभा में श्रद्धेय अटल जी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया और मुझे हिंदू संगठन के वक्ता के रूप में अटल जी के पास ही बैठा दिया गया। तब मेरा भाषण हुआ और मैंने धीरे से अटल जी से पूछा कि मुझे कितने नंबर दिए तब उन्होंने कहा कि 100 में से 95 तो मैंने उनसे पूछा की पांच नंबर किस चीज के काट लिए उन्होंने धीरे से मेरे कान में कहा कि आप कुछ ज्यादा ही गरम-गरम बोलते है तो मैंने उनसे धीरे से कहा कि आप बड़े राजनेता है और मुझे हिंदू युवाओं के नुमाइंदे के नाते देश में बोलना होता है। तो आप जैसा हम कहां बोल पाएंगे तो उन्होंने कहा कि चल ठीक है 100  दिए और बड़ी जोर से हंस दिए। 
उन्होंने बताया कि 1997 के आखिरी की बात है जब मैं बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुक्त करके श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने कहा कि आप भाजपा मुख्यालय जाए और श्रद्धेय कुशाभाऊ ठाकरे व अटल जी से मिलकर बताईए कि मैं आ रहा हूं। तो मैं कार्यालय में उपस्थिति देकर और कुशाभाऊ ठाकरे जी से मिलकर अटल जी से मिलने पहुंचा तो कार्यालय में अनौपचारिक तरीके से बैठे हुए थे और अपनी 51  कविताओं का जो संकल्प प्रकाशित हुआ था उसकी पांडोली बना रहे थे। तो मैं वहां पहुंचा उनके चरण छुए और और उनको नमस्कार किया तो वे बोले आइए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी तो मैंने उनसे कहा कि मैं अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं रहा मेरी तो छुट्टी हो गई है मैं तो अब आपके घर आ गया हूं तो उन्होंने कहा कि आप घर आ गए हैं तो हम भी आपकी धमाकेदार एंट्री के लिए तैयार बैठे हैं। तो उन्होंने मुझसे कहा कि भगवन आपको लोकसभा लड़नी है तो मैं चुप हो गया तो उन्होंने मुझसे सवाल किया कि कहां से लड़ोगे। तो मैंने उनसे कहा आपने और पार्टी ने जो सोचा है या फिर आपका जो भी आदेश होगा, तो उन्होंने कहा कि भिंड से भी चर्चा हो रही है, राजगढ़ से, मथुरा से भी चर्चा हो रही है तो मैंने कहा ठीक है तो उन्होंने कहा कि नहीं नहीं यहां से तो हमारे पास लड़ाने के लिए बहुत लोग हैं। तो 1998 में उन्होंने कहा कि आप ग्वालियर का बीड़ा उठाईए वहां अपना परचम फहराइये तो मैंने कहा जो आपका आदेश। उसके बाद ग्वालियर से लोकसभा चुनाव में मुझे उतार दिया गया उसके बाद फूल बाग में अटल जी की सभा हुई। तो उनके आने से पहले मेरा भाषण हो चुका था तो वह मंच पर आए और मुझसे कहा कि भगवन कुछ बोलो तो मैंने कहा मेरा तो हो गया है तो वह मुझे दूर ले जाकर बोले क्या-क्या मुद्दे बोल रहे हो तो उनको मैंने मुद्दे बताएं। तो उन्होंने कहा कि किसी के दबाव में आकर मुद्दे से नहीं भटकना है और जिस आक्रामकता के साथ चुनाव लड़ रहे हैं उसी आक्रामकता के साथ लड़ना है।  चुनाव का नतीजा उसी से निकलेगा तो मैंने कहा कि मेरे ऊपर जवाब तो आ रहे हैं तो उन्होंने कहा कि वाजपेई कहकर जा रहा है आप सैद्धांतिक मुद्दों से पीछे मत हटिए। चुनाव हो गया और मैं दिल्ली उनसे मिलने गया तो उन्होंने मेरा सर कंधे पर रखकर कहा कि अकल्पनीय, कमाल के शब्द थे अटल जी के। उन्होंने मुझसे कहा ग्वालियर की लड़ाई दूसरे तरह की थी।
इस अवसर पर भारत रत्न श्रद्धैय अटल बिहारी वाजपेई जन्म शताब्दी समारोह के संयोजक एवं जिला मंत्री धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा, सह संयोजक अजय महेंद्रु, त्रिलोक शर्मा, जिला मीडिया प्रभारी नवीन चौधरी, जिला शोशल मीडिया  प्रभारी अरविंद रघुवंशी, मंडल अध्यक्ष जबर सिंह, मंण्डल टोली की सयोंजक श्रीमती रेशू राजावत सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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