मेहंदी के रंगों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक, विद्यार्थियों ने उकेरीं आकर्षक कलाकृतियां

ग्वालियर। मेहंदी के रंगों में जब कल्पनाओं ने आकार लिया तो भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला की खूबसूरती उभरकर सामने आई। विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन करते हुए आकर्षक मेहंदी डिजाइन बनाए। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पारंपरिक डिजाइनों के साथ आधुनिक कला का भी सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इनमें 30 स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों ने अपनी मेहंदी कलाकृतियों के माध्यम से कला और संस्कृति के विविध रंग बिखेरे। किसी ने बारीक बेल-बूटों से डिजाइन सजाए तो किसी ने पारंपरिक आकृतियों और आकर्षक पैटर्न के जरिए अपनी कल्पनाशीलता का परिचय दिया। प्रतिभागियों की कलाकृतियों में बारीकी, सुंदरता और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला।
प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति रुचि विकसित करना तथा उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना था। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी रुचि और कौशल निखारने के साथ भारतीय परंपराओं से जुडऩे का अवसर देती हैं।
डिजाइन की बारीकी के आधार पर हुआ मूल्यांकन
प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. रूबी गुप्ता, सुश्री शीतल कुशवाहा एवं कौरव जी ने निभाई। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की कलाकृतियों का मूल्यांकन डिजाइन की सुंदरता, बारीकी, रचनात्मकता और कलात्मक कौशल के आधार पर किया। प्रतिभागियों की मेहनत और उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति ने प्रतियोगिता को रोचक बनाया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री रेखा गंभीर एवं सुश्री शीतल कुशवाहा ने किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। साथ ही, भारतीय पारंपरिक कला के संरक्षण और संवर्धन का संदेश भी दिया गया।

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