आर्ट वो है जो आपकी कल्पनाओं की अनंत संभावनाओं को उत्पन्न करेंः फाउंडर चांसलर रमाशंकर सिंह

-आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में 9वें अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर-2023 का समारोह के साथ हुआ समापन
- स्कल्पचर एकबियोंड लैग्वेज हैः उदयन वाजपेयी
- आपका अनोखा पन ही आपके जीवन की पहचान बन जाता हैः प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान
- देश की कला और परंपरा धरोहर के रूप में हैः शिल्पकार रॉबिन डेविड
- कलाकृतियों को किया प्रदर्शित

ग्वालियर । आर्ट वो है जो आपकी कल्पनाओं की अनंत संभावनाओं को उत्पन्न कर दे। भारत वो देश है जहां अमूर्त परंपरा का प्रादूर्भाव हुआ है। अमूर्त को कभी हल्का नहीं समझना चाहिये। क्योंकि कलाकार एक चीज को अनेक प्रकार से प्रेषित करता है। अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर के दौरान देश और विदेश से आये शिल्पकारों ने अपने ही अंदाज में अपनी कला का प्रदर्शन कर यहां एक-एक पत्थर पर यूनिक कलाकृतियों को उकेरा है। यह बहुत ही अद्भुत है। प्रसिद्ध शिल्पकार रॉबिन डेविड जी से मैंने आग्रह किया था कि कुछ ऐसा स्कल्पचर तैयार करना जिससे युवा, स्टूडेंट्स और समाज को संदेश जाये। इस पर उन्होंने आज यहां आधुनिक बावड़ी का स्कल्पचर तैयार किया है जो जल संरक्षण का संदेश दे रहा। मैं देश और विदेश से आए सभी शिल्पकारों को शुभकामनाओं के साथ पुनः आने के लिए आमंत्रित करता हूं। यह बात आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के फाउंडर चांसलर श्री रमाशंकर सिंह जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये कही। मौका था, गुरुवार को आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के तुरारी कैंपस स्थित लियोनार्दो द विंची ब्लॉक में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर-2023 (9वां-इंटरनेशनल स्कल्पचर सिंपोजियम-2023‘) के समापन समारोह का।
18 नवंबर से 21 दिसंबर तक चल रहे अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर के समापन समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर किया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान व मनीषा के उद्भट विद्वान, लेखक, कवि एवं कला मर्मज्ञ डॉ. उदयन वाजपेयी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। इस अवसर पर चांसलर श्रीमती रुचि सिंह, प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. एसएन खेड़कर, रजिस्ट्रार डॉ. ओमवीर सिंह, डिप्टी रजिस्ट्रार श्री अनिल माथुर सहित देश-विदेश से आए शिल्पकार और छात्र-छात्राएं आदि विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संपूर्णा पांडा द्वारा किया गया।
स्कल्पचर एकबियोंड लैग्वेज हैः उदयन वाजपेयी
9वें अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर-2023 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उदयन वाजपेयी ने कहा कि स्कल्पचर एक बियोंड लैग्वेज है। इसके माध्यम से शिल्पकार अपनी फीलिंग और कला का प्रदर्शन पत्थरों को अनोखा और दर्शनीय रूप प्रदान करता है। यह पूरा ब्रह्माण एक स्कल्पचर ही तो है। जिसका निर्माण भगवान ने किया है। उन्होंने तीन स्कल्पचर के बारे में बताते हुये कहा कि लिंगम एक ऐसा शिवलिंग है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम के स्वरूप को दर्शाता है। उड़ीसा का जगन्नाथपुरी मंदिर और त्रिभंग मुद्रा में डांसिंग गर्ल्स। ये पुरातन सभ्यता के ऐसे स्कल्पचर हैं जो हजारों साल पहले तैयार किये गये थे। 
आपका अनोखापन ही आपके जीवन की पहचान बन जाता हैः प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान ने कहा कि कोरोना के बाद आईटीएम यूनिवर्सिटी में यह पहला अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर है जो एक महीने से अधिक समय तक चला। यहां विभिन्न देश और भारत के प्रख्यात शिल्पकारों ने आपके बीच आकर अपनी कला का प्रदर्शन कर सामान्य से दिखने वाले पत्थरों पर बहुत ही अद्भुत स्कल्पचर तैयार किये हैं। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि आप यकीन मानिये कि ये दुनिया में सबसे अनोखे हैं, सबसे अलग हटके हैं। क्योंकि ये अनोखापन हर किसी में होता है, जो जीवन में उसकी पहचान बन जाता है। आईटीएम में समय-समय पर आयोजित इस तरह के कैंप, शिविर और कॉन्फ्रेंस को मिस करेंगे तो आप अपने अंदर छुपे हुनर रूपी ज्ञान को प्रदर्शित करने का हुनर मिस कर रहे हैं। इसलिये आप ऐसे आयोजनों का हिस्सा जरूर बनें।
देश की कला और परंपरा धरोहर के रूप में हैः शिल्पकार रॉबिन डेविड
9वें अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर-2023 के समापन समारोह में देश के प्रतिष्ठित शिल्पकार रॉबिन डेविड ने कहा कि मुझे पत्थर तराशते हुए 50 साल हो गए हैं। मैंने जितनी परेशानियां उठाई हैं, वो परेशानी किसी आर्टिस्ट को उठानी नहीं पड़ें। देश की कला और परंपरा धरोहर के रूप में है। जब पहला नेशनल कैंप लगाया गया था तो मेरे टीचर ने पूछा कि तुम तो सेकेण्ड ईयर में हो। कैसे अपनी कला का प्रदर्शन कर पाओगे। बस तभी से मैंने ठान लिया कि मूर्ति कला को मरने नहीं दूंगा। मैं देश के सभी युवाओं से यही आग्रह करना चाहूंगा कि हमारी कला, धरोहर को सहेजें।
कार्यक्रम के अंत में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. एसएन खेड़कर ने कहा कि आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर में देश-विदेश से आए शिल्पकारों ने पत्थरों को मूर्त और अमूर्त रूप देकर प्राण प्रतिष्ठा की है। यह हम सबके लिए खुशी का विषय है। इसके साथ ही में सभी देश और विदेश से आए शिल्पकारों को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। 

कलाकृतियों को किया प्रदर्शित
9वें अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार शिविर-2023 में देश-विदेश से आए शिल्पकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को आईटीएम ग्लोबल स्कूल कैंपस और आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के तुरारी कैंपस में विभिन्न स्थानों जिनमें लियोनार्दाे द विंची ब्लॉक, महात्मा गांधी ब्लॉक, जेसी बॉस ब्लॉक, किर्लोस्कर ब्लॉक, स्पोर्ट्स क्लब सहित अन्य स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है।
शिल्पकारों ने पत्थरों को दिया अद्भुत आकार
1. शिल्पकार माजिद हघीघी, ईरानः-
ईरान से आए शिल्पकार माजिद हघीघी पत्थर पर स्थापत्य और आधुनिक कला के साथ-साथ ईरान की ज्योमैट्रिकल शैली में आकृति तैयार की है। इस कलाकृति को उन्होंने ‘इंक्यूबेटर‘ नाम दिया है।
2. शिल्पकार ल्यूडमाईला मिस्को, यूक्रेनः-
यूक्रेन से आईं शिल्पकार ल्यूडमाईला मिस्को द्वारा स्टेनलैस स्टील और पत्थर से अद्भुत कलाकृति तैयार की है। इस कलाकृति में उन्होंने दुनिया के मैग्नेटिक फील्ड को दर्शाया है। इस कलाकृति का नाम उन्होंने ‘मैग्नेटिक डिवाइस‘ नाम दिया है।
3. शिल्पकार यूरी मिस्को, यूक्रेनः-
यूक्रेन से आए शिल्पकार यूरी मिस्को ने पत्थर पर एटम की कलाकृति का निर्माण किया है। इस कलाकृति को उन्होंने ‘एनर्जी ऑफ एटम‘ नाम दिया है।
4. शिल्पकार सैयद बदर-बदर, इजिप्टः-
इजिप्ट से आए शिल्पकार सैयद बदर-बदर आधुनिक कलाकृति तैयार की है, जिसमें भारत के प्रतीक, कवियों, परंपराओं का अद्भुगत संगम नजर आ रहा है। इस कलाकृति को उन्होंने ‘‘गांधी मोन्यूमेंट’’ नाम दिया है।
5. शिल्पकार अना मारिया निगारा, रोमानियाः-
रोमानिया से आईं शिल्पकार अना मारिया निगारा ने ब्रह्माण के समय चक्र का संदेश देते हुये कलाकृति तैयार की है। इस कलाकृति का नाम उन्होंने ‘एनर्जी फील्ड‘ दिया है।
6. शिल्पकार जियोर्ज स्पाइक, सर्बियाः-
सर्बिया से आए शिल्पकार जियोर्ज स्पाइक ने आधुनिक शिल्प में गोलाई, तिकानो और चौकोर आकृति का शिल्प तैयार किया है। इस कलाकृति के माध्यम से उन्होंने जीवन चक्र को दर्शाया है। 
7. शिल्पकार तस्सुमी सकाई, जापानः-
जापान से आए शिल्पकार तस्सुमी सकाई द्वारा पत्थर पर पर्वत और नदियों की अद्भुत कलाकृति तैयार की है। उन्होंने इस कलाकृति का ‘माउंटेंस एंड रिवर‘ नाम दिया है। 
8. शिल्पकार विशाल भटनागर, चंडीगढ़ः-
चंडीगढ़ से आए शिल्पकार विशाल भटनागर द्वारा पत्थर पर अद्भुत कलाकृति तैयार की गई है। उन्होंने इस कलाकृति का नाम ‘माया‘ दिया है। 
9. शिल्पकार मदनलाल गुप्ता, वाराणसीः-
वाराणसी से आए शिल्पकार मदनलाल गुप्ता मार्वल पत्थर से दो कलाकृतियां तैयार की हैं, जिनका का नाम उन्होंने ‘ द सर्कल इन मार्वल और इमेज इन जेन गार्डन‘ दिय है।
10. शिल्पकार टुटू पटनायक, दिल्लीः-
दिल्ली से आए शिल्पकार टुटू पटनायक ने लाल और पीले पत्थरों पर इंडियन थीम पर आधारित अद्भुत कलाकृति तैयार की है। इस कलाकृति का नाम उन्होंने ‘गेट ऑफ विजिडम‘ नाम दिया है।
11. शिल्पकार भूपेश कावड़िया, उदयपुरः-
उदयपुर सिटी से आए शिल्पकार भूपेश कावड़िया ने सफेद मार्वल पत्थर पर प्रकृति के सौंदर्य को दर्शाया है। 
12. शिल्पकार रॉबिन डेबिड, भोपालः-
भोपाल से आए शिल्पकार रॉबिन डेबिड द्वारा रेड और व्हाइट स्टोन व संगमरमर पत्थर पर दो अलग-अलग कलाकृतियों को तैयार किया है। रेड सेंट स्टोन से उन्होंने जल संरक्षण का संदेश देते जल स्रोत की कलाकृति बनाई है। जिसका नाम उन्होंने ‘बावड़ी‘ रखा है। व्हाइट संगमरमर पर एक अनोखी कलाकृति तैयार की है, इस कलाकृति का उद्देश्य युवाओं में कला के प्रति प्रेम का संदेश देना है। उन्होंने इस कलाकृति का नाम ‘यूटिलिटी‘ रखा है।
13. शिल्पकार अनिल कुमार, भोपालः-
भोपाल से आए शिल्पकार अनिल कुमार ने पत्थ पर विलुप्त होती चक्की की कलाकृति तैयार की है। उन्होंने इस कलाकृति का नाम ‘घट्टी‘ रखा है।

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