ब्राह्मण में ब्राह्मणत्व होना जरूरीः शास्त्री
पुरानी छावनी जय रामेश्वर मंदिर पर भागवत कथा के विश्राम दिवस उमड़े श्रद्धालु
ग्वालियर। ईश्वर ने यदि ब्राह्मण कुल में जन्म दिया है तो ब्राह्मण का करम करना भी जरूरी है नित्य गायत्री मंत्र का पाठ और सूरज को जल देने वाला ब्राह्मण कभी गरीब नहीं हो सकता है। यह विचार पं. सुरेश शास्त्री ने पुरानी छावनी जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हुई श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए रविवार को व्यक्त किए। श्रद्धालु मुग्ध हो गए। उन्होंने कहा कि सुदामा पर चने की चोरी का इल्जाम मिथ्या है। वे चोर नहीं त्यागी थे। उन्होंने बताया कि यदि तन्मय होकर लक्ष्मीनारायण भगवान की साधना करता है तो उसे सभी भौतिक सुखों व साधनों की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि वेद की ऋचायें कन्या बनकर प्रभु सेवा करने आई थीं। कर्मकाण्ड में अस्सी हजार मन्त्र ब्रह्मचारी के लिए, 16 हजार मन्त्र गृहस्थ के लिए हैं। भगवान ने सोलह हजार उपासना रूपी वेद की ऋचाओं से विवाह किया। उन्होंने कहा कि तन, मन, धन जो भगवान को नहीं देता वह दरिद्र होता हैं। दरिद्र होकर वह पाप करता हैं और पाप के प्रभाव से नरक में जाता हैं फिर और पाप करता हैं और दरिद्र होता हैं। इस दरिद्रता के दुष्चक्र से बाहर आना हैं तो भगवान के निमित्त दान करो। उन्होंने बताया कि सुदामा ज्ञानी थे, लेकिन आजकल ज्ञान केवल अर्थोपार्जन का माध्यम रह गया हैं। ज्ञान का फल धन या प्रष्ठिता नहीं, परमात्मा से मिलना हैं सुदामा की पत्नी सुशीला महान पतिव्रता थी। गरीब पति की निष्ठा से सेवा करने वाली पत्नी सुशीला है। भगवान की सेवा, पूजा माध्यम हैं परन्तु लक्ष्य परमात्मा से मिलना हैं, इसके लिए जीवन में साधना आवश्यक है। सुदामा चरित्र का सुंदर चित्रण देखकर श्रद्धालुओं की आंखे छलछला आईं। कथा स्थल पर सुदामा प्रसंग की भव्य झांकी सजाई गई। उन्होंने बताया कि जीव को माया ने पकड़ रखा हैं, जो परमात्मा की जय-जयकार करता हैं। वह माया के बंधन से मुक्त हो जाता हैं। व्यास पीठ का पूजन मुख्य यजमान सरोज प्रेम पचौरी ने सपरिवार किया। इस मौके पर देवेंद्र प्रताप सिंह रामू भैया, सुनील शर्मा,गंगाराम बघैल.सतीश बौहरे, जयराम पचौरी, संघ प्रचारक सुरेंद्र मिश्रा, रिटायर आईएएस वीएम शर्मा, सचिन पचौरी सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।