श्रीरामचरितमानस के बाल कांड की चौपाइयों का पाठ करने से बच्चों को मिलती है विद्या और संस्कार: महंत रामदास महाराज
- फिर एक प्रयास संस्था ने कराया रामायण प्रतियोगिता का आयोजन, 664 बच्चों ने लिया उत्साह से हिस्सा
- 18 जनवरी को घोषित होंगे परिणाम, पुरस्कार भी बांटे जाएंगे
ग्वालियर:
श्रीरामचरितमानस पाठ के बाल कांड की चौपाइयों का नियमित पाठ बच्चों के जीवन में न केवल आध्यात्मिक उन्नति करता है, बल्कि उन्हें विद्या, सद्बुद्धि और निर्भयता भी प्रदान करता है। यदि बच्चे प्रतिदिन श्रद्धा के साथ श्रीरामचरितमानस के बाल कांड की चौपाइयों पाठ करते हैं, तो उन पर भगवान श्रीराम की विशेष कृपा बनी रहती है और विद्या की प्राप्ति होती है। यह उद्गार दंदरौआ धाम के महंत श्री रामदास जी महाराज ने व्यक्त किए।
वे रविवार को कंपू स्थित टकसाल स्कूल स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय परिसर में फिर एक प्रयास संस्था द्वारा आयोजित श्रीरामायण प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर बच्चों और अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में भारीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर, ननि के पूर्व सभापति बृजेंद्र सिंह जादौन शामिल हुए। फिर एक प्रयास संस्था के संस्थापक पंडित अंकित शर्मा, अध्यक्ष उपेंद्र शर्मा, सचिव सचिन श्रीवास्तव, प्रवेश श्रीवास, लक्ष्मी सत्यावली, पूर्जा शर्मा, राहुल श्रीवास्तव, मोहित जोशी, दीपिका श्रीवास्तव, महेश पाल, सुनील बाहुबली, सुशील यादव, दीपक गुप्ता, राजीव राठौर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि दंदरौआ धाम महंत श्री रामदास जी महाराज ने आगे कहा कि हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास ने स्वयं को 'बुद्धिहीन' मानते हुए पवनपुत्र हनुमान से बल, बुद्धि और विद्या की प्रार्थना की है। 'बुद्धि हीन तनु जान के, सुमिरो पवन कुमार, बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार' यह पंक्ती प्रत्येक बच्चे को रोजाना मंत्र के रूप में पढ़नी और मनन करनी चाहिए। इससे बच्चों के मन से भय, आलस्य और नकारात्मक विचार दूर होते हैं तथा उन्हें एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ विद्या की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार और नैतिक मूल्यों की भी आवश्यकता है। रामायण जैसे महान ग्रंथ बच्चों को सत्य, धर्म, मर्यादा, आज्ञाकारिता और कर्तव्यबोध की शिक्षा देते हैं। ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भगवान श्रीराम ने किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के आराध्य हैं: भाजपा प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर ने कहा कि भगवान श्रीराम हर रूप में विद्यमान हैं और उनके संपूर्ण जीवन से समाज को मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र को प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर बच्चों को अवश्य जानना चाहिए और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
लोकेंद्र पाराशर ने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया और सदैव उनका सम्मान किया, वह आज के समाज के लिए एक महान उदाहरण है। वर्तमान समय में बच्चों को भगवान श्रीराम के जीवन से सीख लेते हुए अपने माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करना चाहिए तथा उनकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए। इससे परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत बनता है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि वे केवल किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के आराध्य हैं। उन्होंने निषादराज, शबरी, वानर और ऋषि-मुनियों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को समान भाव से अपनाया। यही समरसता और सामाजिक समावेशन आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। लोकेंद्र पाराशर ने ऐसे आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि श्रीरामायण प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम बच्चों में संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभावना का विकास करते हैं। उन्होंने फिर एक प्रयास संस्था को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई दी और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
664 बच्चों ने उत्साह से ओएमआर सीट पर हल किए प्रश्न
फिर एक प्रयास संस्था द्वारा आयोजित श्रीरामायण प्रतियोगिता में 664 बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इस प्रतियोगिता में जूनियर ग्रुप में कक्षा 3 से 6वीं तक के 246 बच्चे और सीनियर ग्रुप में कक्षा 7 से 10वीं तक के 418 बच्चों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित 100 प्रश्नों वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर ओएमआर सीट पर टिक लगाकर दिया। अब इस प्रतियोगिता का परिणाम और पुरस्कार वितरण 18 जनवरी को किया जएगा।