आपका
कैलाश विजयवर्गीय
इंदौर का बेटा
इंदौर से अपनी बात....
पिछले 12-15 दिन संभवत: इंदौर के सबसे कठिन दिनों में से एक रहे हैं। क्या कुछ नहीं सहा हमने | हमारे सैकड़ों लोग बीमार हुए, करीब 18 लोग हमें छोड़कर चले गए। आठ वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर के लिए इससे बुरा क्या हो सकता था कि यह आपदा गंदे पानी की वजह से आई। यह हम सबके लिए बड़ा सबक है। भागीरथपुरा में पेयजल पाइप लाइन को लेकर लंबे समय से प्रस्ताव थे, उन्हें समय पर लागू करने में विफल हुए। जो जिम्मेदार थे, उन पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन फिर भी मन बहुत व्यथित है, क्योंकि इससे हमारे इंदौर का नाम खराब हुआ।
अभी तो ऐसा लग रहा है, जैसे वर्षों मेहनत कर शहर के बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों, युवाओं के साथ अफसर, जनप्रतिनिधियों ने मिलकर जो पहचान बनाई थी, उस पर दाग लगा है। इसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि इंदौर इसे लेकर ही नहीं बैठ सकता। हमने हमेशा अपने खून-पसीने से इंदौर को बनाया है। इस कठिन वक्त फिर उसी साथ और साहस की जरूरत है। व्यक्तिगत तौर पर मेरा भी यही संकल्प है कि ऐसा इंतजाम करना है कि अब इंदौर ही नहीं पूरे प्रदेश में गंदे पानी से किसी के बीमार पड़ने की नौबत ही न आए।
इंदौर हमेशा से सामूहिकता में जीता है, खुद से ज्यादा शहर की चिंता करता है। जो हुआ वह बहुत दुःखद है, लेकिन उसमें हम सबके लिए ढेर सारे सबक हैं। कैसे अब हम इन गलतियों को ठीक कर पाएं, कठिनाइयों से निजात पा सकें और कैसे दोबारा इंदौर के उसी गौरव को जगा सकें।
आइये.. फिर से नई शुरुआत करते हैं.. देश के सबसे स्वच्छ शहर को फिर उसी मुकाम, उसी मान-सम्मान पर फिर से प्रतिष्ठित करते हैं। जनप्रतिनिधि होने के नाते ये हमारी पूरी टीम की जिम्मेदारी भी है, लेकिन सभी के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। इंदौर फिर नित नए रिकॉर्ड बनाए। आएं इंदौर को हम हरियाली, स्वच्छता, हवा की गुणवत्ता, साफ पानी और सेहतमंद वातावरण के साथ देश का सबसे सर्वश्रेष्ठ शहर बनाएं।
भागीरथपुरा के बाद एक संकल्प... फिर गौरव लौटाने का, उसी प्रतिष्ठा को पाने और इंदौर को नए मुकाम पर पहुंचाने का ।
जय हिंद, जय मप्र, जय इंदौर