ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक के रूप में पुस्तकालयों एवं सूचना केंद्रों की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला कुलगुरु राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, धीरेंद्र सिंह भदौरिया संयोजक मध्य भारत प्रांत शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली तथा एमएलबी के प्रोफेसर अरविंद कुमार शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने कहा कि पुरानी परंपराओं और धरोहरों को किस प्रकार समझा जाए तथा उनका संरक्षण किया जाए, इसमें पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुस्तकालयों के माध्यम से हम अपनी ज्ञान परंपरा को समझने और उससे जुड़ने का अवसर प्राप्त करते हैं। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. हेमंत शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके पश्चात अतिथियों ने मां सरस्वती का पूजन एवं माल्यार्पण किया। इस अवसर पर पुस्तक का विमोचन भी किया गया। प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने कहा कि सरकार द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में वेदों में उपलब्ध ‘सत्यं ऋतम्’ शब्दों की पूर्ण व्याख्या निहित है। उन्होंने ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विभाग के प्रो. जे.एन. गौतम, डॉ. राजेंद्र वेध , डॉ. प्रतापदेव सिसोदिया, प्रो. एम.के. गुप्ता, प्रो. सुशील मंडेलिया, डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौर, डॉ. अमृता जादौन, डॉ. पूनम, शकील कुरैशी, अश्वनी त्रिपाठी, अतुल, रामलाल, यूनुस खान, संजय जादौन, उमा मिश्रा एवं किरण मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं सयोजक प्रो. हेमंत शर्मा ने किया।