सफलता की कहानी: कच्ची पगडंडी बनी विकास की राह…..
(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर । कभी बरसात के मौसम में घौंघा बिलौआ रोड से सूखापठा (गोलपहाड़िया) तक का लगभग 3 किलोमीटर लंबा मार्ग ग्रामीणों के लिए इम्तिहान की घड़ी हुआ करता था। कच्चे रास्ते पर कीचड़ और फिसलन के कारण यहां से गुजरना बड़े मुश्किल का काम था। बीमार को अस्पताल पहुँचाना, बच्चों का स्कूल जाना और किसानों की उपज का मंडी तक पहुँचना, हर काम मुश्किल हो जाता था। पर अब 3 किलोमीटर लंबी यह कच्ची पगडंडी विकास की नई राह बन गई है।
विकासखण्ड डबरा के इस गाँव में प्रदेश की सबसे पिछड़ी जनजातियों में शुमार सहरिया जनजाति के लगभग 223 लोग रहते हैं, जो इस पगडंडी पर पक्के रास्ते की राह देख रहे थे। उनकी यह प्रतीक्षा पीएम जन-मन (प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान) ने पूरी कर दी। इस अभियान के दौरान प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत घोंघा बिलौआ रोड से सूखापठा (गोलपहाड़िया) मार्ग की स्वीकृति मिली और जून 2026 में 237.49 लाख रुपये की लागत से लगभग 3 किलोमीटर लंबा डामरीकृत मार्ग बनकर तैयार हो गया। मार्ग में चार पुलियाओं का निर्माण भी कराया गया है, जिससे बरसात का पानी अब आवागमन में बाधा न बने। सड़क बनते ही गाँव की तस्वीर बदलने लगी है। डामरीकृत मार्ग और पुलियाओं के कारण ग्रामीणों को अब चौबीसों घंटे और हर मौसम में आवागमन की सुविधा मिल रही है।
किसान अपनी उपज आसानी से मुख्य मंडी तक पहुँचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों की राह आसान हुई है और स्वास्थ्य सुविधाएँ भी अब सुगम हो गई हैं। जहाँ पहले धूल भरा ऊबड़-खाबड़ रास्ता था, वहाँ आज खेतों के बीच से गुज़रती काली, चिकनी सड़क गाँव को मुख्य मार्ग से जोड़ रही है। यह बदलाव केवल सड़क का ही नहीं, सहरिया समुदाय के लिए सम्मान, अवसर और बेहतर भविष्य की नई शुरुआत भी है। गाँव के सहरिया जनजाति के लोगों का कहना है कि पीएम जन-मन अभियान सही मायने में हम लोगों के जीवन में नया उजाला लेकर आया है। इसके लिये हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति सदैव आभारी रहेंगे।