भोग भूमि नहीं,योग और कर्मभूमि है भारत: संत रमेश भाई
दंदरौआ धाम में श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन
ग्वालियर। भारत भोग नहीं, योग और कर्मभूमि हैं। लेकिन यह चिंता की बात है सोशल मीडिया और ग्लोबलाइजेशन से प्रभावित होकर आज देश किस ओर जा रहा है। हम अपने मूल्यों को यदि भूल गए तो भारत योग और कर्मभूमि कैसे कहलाएगा। यह विचार संत रमेश भाई ओझा ने शुक्रवार को दंदरौआ धाम में आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस व्यक्त किए।
उन्होंने कथारस की वर्षा करते हुए कहा कि भगवान मिले न मिले, लेकिन यदि कोई सच्चा संत मिल जाए, तो जीवन धन्य हो जाता है। वो आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ भक्त को भगवान की ओर ले जाता है। लेकिन बड़े भाग्य की बात कोई साधु मिले और अपना ले।
एक संत, एक पंथ, एक कंत, एक ग्रंथ----
उन्होंने कहा जीवन में एक संत, एक पंथ, एक कंत और एक ग्रंथ होना चाहिए। एक में ही इतनी ताकत है कि मनुष्य भवसागर पार हो सकता है। एक संत यानि ऐसा गुरू जो भगवत मार्ग दिखाए। एक पंथ यानि संप्रदाय, हम भाग्यशाली हैं कि सनातन में अनेक संप्रदाय हैं। एक कंत यानि स्वामी( ईष्ट) एक ग्रंथ, हमारे यहां श्रीमद्भागवत, श्रीराम चरित्र मान और अनेक ग्रंथ है।
सखी रूप में हैं डॉक्टर हनुमान---
उन्होंने बताया कि भक्त के भाव में ही भगवान हैं। भगवान भले ही साकेत चले गए,लेकिन हनुमानजी कलिकाल में भी मौजूद हैं। उन्होंने भगवान से आशीर्वाद लिया कि जब तक धरा पर भगवान की कथा होती रहेगी वे यहीं रहेंगे। कथा से पापरूपी मृग मनुष्य की काया को छोड़कर भाग जाते हैं। दंदरौआ मेें वे सखी रूप में विराजमान हैं और डॉक्टर बनकर पीड़ितों को आरोग्य प्रदान कर रहे हैं।
घर की अन्नपूर्णा है गृहलक्ष्मी----
उन्होंने कहा कि गृहलक्ष्मी( पत्नी) घर की अन्नपूर्णा है। वो घर में सबकों भोजन परोसेने के बाद सबसे बाद में खाती हैं। जिस दिन पतीले में सब्जी कम होती है तो वह खुश होती है कि आज सबने अच्छे से खाया। पति की भी जिम्मेदारी है कि वो कभी कभी पत्नी की मदद करे और उसको भी खाना परोसे। ऐसे पति मिलने पर वो भी सोचती है करवाचौथ व्रत सफल हुआ। वो पति से लव, केयर और रेस्पेक्ट चाहती है।
इस मौके पर दंदरौआ धाम के महामंडलेश्वर रामदास महाराज,ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा. भिंड सांसद संध्या राय. कथा यजमान अनूप मिश्रा, महंत अवध बिहारीदास, रामनिवास रावत,ओपीएस भदौरिया.ग्वालियर भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया. पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल. इंटक नेता राजेंद्र नाती, कुलदीप सेंगर, रामशंकर शर्मा,सत्येंद्र गुरूजी पवन शास्त्री, जलज त्रिपाठी, प्रदीप त्रिवेदी, अमन दैपुरिया, नरेंद्र चौधरी सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
दंदरौआ महाराज पर पुस्तक का किया विमोचन--
कुलदीप सेंगर द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अच्छी पुस्तकें आदित्य( सूर्य) के समान होती हैं। उन्होंने दो पंक्तियों से साहित्य की महत्ता बताई-अंधकार है वहां जहां आदित्य नहीं हैं,मुर्दा है वो देश, जहां साहित्य नहीं है। साहित्य के अभाव में आदर्श नहीं है और आदर्श के बिना जीवन नहीं है।संतों का जीवन आदर्श होता है। उन्होंने बताया इस पुस्तक में दंदरौआ महाराज का जीवन चरित्र,सनातन से संबधित लेख और साधकों की दिव्यानुभूति है। उन्होंने कहा कि भगवत चरित्र व भगवान का भजने वालों का चरित्र दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। भगवान भी भक्त की स्तुति करते हैं। भगवान कहते हैं जो मुझे जिस प्रकार मुझे भजता है मैं भी उसे उसी प्रकार भजता हूं। भागवत के तृतीय स्कंद में भगवान कपिल ने भी संतों के लक्षण बताए हैं।
बागेश्वर बाबा भी पहंचे दंदरौआ धाम
रमेश भाई व दंदरौआ महाराज से मिले
अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री भी गुरुवार देररात दंदरौआधाम पहुंचें। धाम के आचार्यो द्वारा मंत्रोउच्चारण कर उनका स्वागत एवं अभिवादन किया गया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक संत रमेश भाई ओझा से मुलाकात करने के बाद डॉ. हनुमान जी महाराज के दर्शन कर वेद मंत्रौउच्चारण के साथ पूजा अर्चना करके महामंडलेश्वर रामदास महाराज से आशीर्वाद लिया। दंदरौआ महाराज ने शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को आशीर्वाद
दिया। इस दौरन उन्होंने दंदरौआ धाम की पुरानी यादों को साझा किया।