डॉ० भीमराव अंबेडकर पोलीटेक्निक कालेज में हुआ वन्देमातरम, 545 प्रतिभागी छात्र छात्राएं हुई शामिल


ग्वालियर । डॉ० भीमराव अम्बेडकर पोलीटेकनिक महाविद्यालय ग्वालियर में आज प्रातः विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की नमामि भारतम् योजना के अन्तर्गत राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सामूहिक सस्वर गायन किया गया। वंदेमातरम गायन कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र- छात्राओं एवं स्टाफ सहित 545 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संयोजन महाविद्यालय के प्रवर श्रेणी व्याख्याता  योगेन्द्र वाष्र्णेय द्वारा किया गया। कार्यक्रम की स्वतंत्र साक्षी महाविद्यालय की एचएमसीटी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ० बिन्दु खरे थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पी.जी.व्ही. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० सुनील पाठक ने की। महाविद्यालय के प्राचार्य अजय कुमार जैन एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ० सुनील पाठक ने भी प्रतिभागियों की उपस्थिति का सत्यापन किया ।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम गायन के पश्चात अपने उद्बोधन में डॉ० सुनील पाठक ने वंदे मातरम गीत का यशस्वी इतिहास बताया। श्री बंकिम चन्द्र चटर्जी ने माँ भारती की वंदना हेतु इस गीत की रचना 07 नवम्बर 1875 में एक दिन में की। बाद में सन 1882 में यह गीत उनके उपन्यास 'आनन्द मठ' में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इस गीत का गायन स्वतंत्रता संग्राम में भारत भूमि के वीरों में एक अलग ही स्तर का उत्साह वर्धन कर देता था । स्वतंत्रता संग्राम की अनेक शूरवीरो जैसे नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बॉस, भीकाजी कामा, भगिनी निवेदिता इत्यादि ने इस गीत का सदुपयोग स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित करने में किया। सन 1905 में बंग-भंग आन्दोलन के दौरान वंदेमातरम गीत ने घर-घर और हर गली मौहल्ले में गूंज कर स्वंतत्रता का दिया जलाये रखा ।
आज के इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त छात्र - छात्राओं का अनुशासन देखते ही बन रहा था । इस कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती की योजना के अनुसार पूरे देश में एक साथ एक समय सामूहिक रूप से सस्वर गायन का एक करोड से अधिक प्रतिभागियों द्वारा किया जाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किये जाने का लक्ष्य है।

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