ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने अध्ययनशालाओं के शिक्षकों की बैठक लेकर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि समाज और देश में शिक्षकों का बहुत सम्मान और विश्वास है, जिसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। शिक्षक मां के समान होता है, जो अपने संस्थान और विद्यार्थियों की निरंतर चिंता करता है।
कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। वे व्यक्तिगत स्तर पर शिक्षण, शोध, प्लेसमेंट सहित विभिन्न संस्थानों से संपर्क कर एमओयू कराने का प्रयास करेंगे, जिससे विश्वविद्यालय को व्यापक लाभ मिलेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों को 10 दिन के भीतर अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करने तथा उसमें कार्यों के साथ समस्याओं और उनके समाधान का सुझाव देने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षकों से शोध एवं अध्यापन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। बैठक में शिक्षकों ने अपनी समस्याएं भी रखीं, जिस पर कुलगुरु ने एक माह के भीतर समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के विकास में कुलगुरु के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने का विश्वास दिलाया।
इससे पूर्व कुलगुरु प्रो. राजपूत ने प्रशासनिक भवन का निरीक्षण किया और देर से आने वाले कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स विभाग, डिस्टेंस एजुकेशन, आजीवन विस्तार शिक्षा तथा पत्रकारिता विभाग का निरीक्षण कर सभी को समय पर आने और अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रो. जे.एन. गौतम, प्रो. एस.के. सिंह,प्रो के एस ठाकुर,प्रो. विवेक बापट, डॉ. नवनीत गरुड़, डॉ. शांति देव सिसोदिया, प्रो. एस.एन. महापात्रा, डॉ. एम.के. गुप्ता, डॉ. सपन पटेल, डॉ. सुशील मंडेरिया सहित अध्ययनशालाओं के सभी शिक्षक उपस्थित रहे।