01से 03 दिसंबर 26 को देशव्यापी जेल भरो आंदोलन : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
*बदलाव जरूरी है*
*के नारे के तहत राजनीतिक अभियान को तेज करने का CPI राष्ट्रीय परिषद का आह्वान*
नई दिल्ली (ग्वालियर): भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक 2–3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में देश और दुनिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई, 6–15 अगस्त के दौरान पदयात्राओं और जनसंपर्क के विभिन्न माध्यमों से चलाए गए पार्टी के राजनीतिक अभियान की समीक्षा की गई तथा 01 सितंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित बेहद सफल *बदलाव जरूरी है* रैली का आकलन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता CPI राष्ट्रीय सचिव डॉ. गिरीश चंद्र शर्मा ने की। CPI के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड डी. राजा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा पार्टी के चल रहे राजनीतिक अभियानों और हस्तक्षेपों के बारे में राष्ट्रीय परिषद को जानकारी दी।
देशभर से बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों ने CPI के राजनीतिक हस्तक्षेप को समयानुकूल और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह देश के राजनीतिक माहौल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच यह समझ बढ़ रही है कि RSS के नियंत्रण वाली मोदी सरकार अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और महंगाई पर नियंत्रण जैसे लगभग हर प्रमुख मोर्चे पर विफल रही है।
म प्र राज्य कार्यकारिणी सदस्य कॉमरेड कौशल शर्मा एडवोकेट ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में नागरिकों, विशेषकर युवाओं और छात्रों में बढ़ती निराशा और असंतोष को रेखांकित किया। हाल का देशव्यापी छात्र आंदोलन इसी बढ़ते आक्रोश की अभिव्यक्ति है। CPI का राजनीतिक अभियान समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाने में सफल रहा है। भले ही इन वर्गों की समस्याएं अलग-अलग हों, लेकिन सभी को मोदी सरकार से निराश होने का साझा अनुभव है। राष्ट्रीय परिषद ने कहा कि “बदलाव जरूरी है” का नारा इस सामूहिक निराशा और सार्थक एवं सकारात्मक बदलाव की जनता की इच्छा की एक समयानुकूल और प्रभावी राजनीतिक अभिव्यक्ति बनकर उभरा है।
पदयात्राओं के माध्यम से यह संदेश देशभर के गांवों और कस्बों तक पहुंचाया गया। लोगों के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों को उठाते हुए उन्हें बदलाव की मांग के लिए लामबंद किया गया। इस अभियान का समापन 1 सितंबर को रामलीला मैदान में आयोजित ऐतिहासिक “बदलाव जरूरी है” रैली के रूप में हुआ, जिसमें 80,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय परिषद ने लामबंदी को रोकने के BJP के प्रयासों की कड़ी निंदा की। केरल और तमिलनाडु से आने वाली पहले से बुक की गई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया, जबकि उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में कॉमरेडों को नजरबंद किया गया। राष्ट्रीय परिषद ने कहा कि इस तरह के अलोकतांत्रिक कदम दिखाते हैं कि जनता के बढ़ते राजनीतिक उभार से BJP कितनी घबराई हुई है।
राष्ट्रीय परिषद ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा अपने आलोचकों को “दिमागी नक्सल” बताकर निशाना बनाने का प्रयास उल्टा पड़ चुका है और अब अप्रासंगिक साबित हो गया है। मोदी शासन की विफलताओं के सबसे मुखर और लगातार आलोचकों में शामिल CPI ने राष्ट्रीय राजधानी में हजारों लोगों को सफलतापूर्वक लामबंद करके अपनी निरंतर जन-स्वीकार्यता का प्रदर्शन किया है।
इस व्यापक जन लामबंदी के साथ एक निरंतर प्रकाशन अभियान भी चलाया गया, जिसके तहत CPI ने देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर पुस्तिकाएं प्रकाशित कीं। इसके साथ ही प्रतिष्ठित और प्रबुद्ध व्यक्तित्वों को जोड़ते हुए जनसंपर्क अभियान भी चलाया गया।
रामलीला मैदान की लामबंदी वर्तमान सरकार के खिलाफ जनता के आक्रोश का ऐतिहासिक और शक्तिशाली प्रदर्शन थी। राष्ट्रीय राजधानी में CPI के बैनर तले हजारों लोगों को लामबंद करने की क्षमता यह दर्शाती है कि पार्टी और उसका राजनीतिक कार्यक्रम आज भी जनता के बीच प्रभाव रखता है तथा मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति का उसका आकलन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय परिषद ने कहा कि यह रैली कई दशकों में राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी वामपंथी पार्टी द्वारा किया गया सबसे बड़ा जनसमूह थी। परिषद ने इस महत्वपूर्ण दौर में CPI नेतृत्व द्वारा किए गए राजनीतिक हस्तक्षेप की सराहना की और सभी पार्टी इकाइयों, नेताओं, कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों को अभियान और रैली को शानदार सफलता दिलाने के लिए बधाई दी। रैली के लिए चलाया गया सोशल मीडिया अभियान, अपनी सीमाओं के बावजूद, CPI की लामबंदी को व्यापक जनता तक पहुंचाने और उन लोगों तक संदेश पहुंचाने में सफल रहा जो रैली में शामिल नहीं हो सके।
“बदलाव जरूरी है” नारे की निरंतर प्रासंगिकता को देखते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व ने अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है और इसके तहत निम्नलिखित कार्यक्रम तय किए हैं:
1. *02 अक्टूबर: सांप्रदायिक सद्भाव दिवस*
CPI पूरे देश में 02 अक्टूबर, गांधी जयंती को सांप्रदायिक सद्भाव दिवस के रूप में मनाएगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत के सामाजिक ताने-बाने की रक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया जाएगा। RSS-BJP शासन के तहत बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन के खिलाफ भी आवाज बुलंद की जाएगी।
2. *07 नवंबर: क्रांति दिवस*
CPI 07 नवंबर को क्रांति दिवस के रूप में मनाएगी। इस दिन दुनिया भर के मुक्ति संघर्षों और क्रांतिकारी आंदोलनों में कम्युनिस्टों की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया जाएगा। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और लोकतांत्रिक परिवर्तन में कम्युनिस्टों के योगदान को भी रेखांकित किया जाएगा।
परिषद ने प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और व्यापक सहायता की मांग की, जिसमें मृतकों के परिवारों को पर्याप्त सहायता, आवश्यक बुनियादी ढांचे की बहाली तथा बाढ़ प्रभावित समुदायों के दीर्घकालिक पुनर्वास को सुनिश्चित करना शामिल है।
CPI राष्ट्रीय परिषद ने “बदलाव जरूरी है” के बैनर तले राजनीतिक संघर्ष को और तेज करने के अपने संकल्प को दोहराया। पार्टी ने मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों, महिलाओं तथा समाज के सभी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष वर्गों को एकजुट करते हुए देश के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक दिशा और भारत की जनता के बेहतर भविष्य के संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।