जो पूर्व के मुख्यमंत्री नहीं कर पाये, वह मोहन यादव ने कर दिखाया
(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर / भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव वह कर रहे है, जो अभी तक कोई भी सरकार का मुखिया नहीं कर सका। उन्होंने कैलारस शक्कर कारखाने को पुनः शुरू करने की जो पहल की है वह काबिले तारीफ है। उनकी इस पहल की सराहना करते है, निश्चित ही कैलारस शक्कर कारखाना चंबल संभाग में अब विकास का एक नया मायना साबित होगा और चंबल की बीहड़ वाली जमीन अब गन्ना बेल्ट के रूप में विकसित होगी। वैसे भी यहां स्पष्ट है कि 2011 में आपसी विवादों, तथाकथित उठापटक के बीच बंद हुआ 1250 मीट्रिक टन गन्ना पेराई वाला कैलारस शक्कर कारखाना पुनः शुरू होने की उम्मीद यहां के लोग छोड़ चुके थे।
वैसे यहां आपको बता दें कि ग्वालियर चंबल संभाग में कैलारस सहकारी शक्कर कारखाना और डबरा चीनी कारखाना कभी अंचल की शान हुआ करते थे और इनकी भारी डिमांड के चलते कृषक भी गन्ना उत्पादन में भरपूर रूचि लेने थे, लेकिन समय के साथ बदली तकनीक से यह दोनों ही शक्कर कारखाने बंद हो गये, जिससे गन्ना क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध यह इलाके पिछड़ रहे थे। यहां के किसान भी गन्ना उगाना भूलने लगे थे। शक्कर कारखाने से जुड़े मजदूर भी बेरोजगार हो गये थे। लेकिन अब यहां के किसानों, नेताओं की लगातार पैरवी के बाद जनहितैषी व मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने जो निर्णय कैलारस शक्कर कारखाने के लिये लिया है निश्चित ही उससे अंचल में नई शुगर क्रांति आयेगी और लगभग दो हजार श्रमिकों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। वहीं किसान यहां अपनी जमीनों पर गन्ने की पैदाबार करके मुनाफा कमा सकेंगे। वैसे कैलारस का यह शक्कर कारखाना पूरी तरह से बिकने की कगार पर था और इसकी जमीन पर भूमाफियाओं की निगाह भी थी। लेकिन अब कैलारस शक्कर कारखाने के चालू होने की प्रक्रिया शुरू होने से अंचल के लोग बेहद खुश हैं।
उनका कहना है कि मोहन सरकार ने जो कर दिखाया, जो दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह की सरकार नहीं कर सकी और न ही कोई नेता इसकी पहल कर पाया। अब आज देशभर में कैलारस शक्कर कारखाने की अभिरूचि का आमंत्रण विज्ञापन छपने से उत्तर भारत की चीनी मिलों के मालिकान का ध्यान इस ओर गया हैं। अब 15 सितंबर तक इसको लीज पर लेने के इच्छुक चीनी मिलों के संचालकों से आवेदन मांगे गये हैं। इसे 30 वर्ष की लीज अवधि पर दिया जायेगा और बाद में कार्य संतोषजनक यानी कारखाना बेहतर चलने पर होने पर फिर लीज अवधि बढ़ा दी जायेगी। कैलारस शक्कर कारखाने की दैनिक क्षमता 1250 मीट्रिक टन गन्ना पेराई क्षमता है, यह कारखाना 12.86 हैक्टेयर क्षेत्र में एनएच 552 पर कैलारस रेलवे स्टेशन के नजदीक ही स्थित हैं।
अब जेसी मिल के श्रमिकों की आस बढ़ी
कैलारस शक्कर कारखाने की शुरूआत पहल के बाद अब ग्वालियर में भी जेसी मिल के श्रमिकों की आस बढ़ गई है। उनका कहना है कि प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री जेसी मिल पर भी जल्दी निर्णय लें, ताकि हमारा बकाया लेनदारी हमें मिल सकें।
प्रदेश में बढ़ रहा औद्योगीकरण
मप्र के मोहन राज में औद्योगीकरण लगातार बढ़ रहा है। 26 अगस्त को मालनपुर में 450 करोड़ के गोदरेज कन्जूमर कंपनी के विस्तार चरण की शुरूआत होनी है, जिसका शुभारंभ करने स्वयं मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव मालनपुर आ रहे हैं।