ऐसे ही सबके प्रिय नहीं हो गये थे संघप्रिय

- उनका काम विजन याद रहेगा
(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर। ग्वालियर में 17 माह के अपने नगर निगम आयुक्त कार्यकाल में युवा आईएएस अधिकारी संघप्रिय ऐसे ही सबके प्रिय नहीं हो गये थे। उन्होंने ग्वालियर में वर्षों से अस्त व्यस्त नगर निगम को पटरी पर लाने का प्रयास किया और काफी हद तक वह सफल भी रहे। नियमों के पक्के दृढ़निश्चयी नगर निगम आयुक्त संघप्रिय लगातार शहर को सुधारने में लगे थे, उनका तबादला ऐसे समय हुआ जब पूर्णतः ग्वालियर में नगर निगम से जुड़े हर क्षेत्र में रिजल्ट आने लगे थे। वह पूरी तन्मयता से काम कर रहे थे और अब उनके कार्यकाल में बारिश के बाद सड़कों को सुधारने का क्रम शुरू होना ही था, उनके काम स्पष्ट थे वह निगम के दलालों के फेर में नहीं उलझे और न ही मंत्रियों के एजेंटों की भभकी में आये। उन्होंने काम किया, वह निगम में आने वाले हर व्यक्ति की बात सुनते थे और उस पर अमल भी करते थे। उनकी शैली अलग थी वह सुबह ही 6 बजे फील्ड में निकल जाते थे। 
उन्होंने पिछले कमिश्नर अपने बैचमेट अमन वैष्णव से चार्ज लिया था और अब भी अपने बैचमेट अभिषेक चौधरी को चार्ज देकर जायेंगे। बहुत कम लोगों को पता होगा कि अमन वैष्णव, संघप्रिय और अभिषेक चौधरी अच्छे सखा भी हैं। इसी कारण जिन क्षेत्रों में संघप्रिय के काम रह गये है उन पर वह नये कमिश्नर अभिषेक चौधरी को टिप्स भी देकर जायेंगे। निश्चित ही ग्वालियर अब फिर उनकी दिखाई विकास की राह पर अभिषेक चौधरी की अगुआई में आगे बढ़ेगा। निगम आयुक्त संघ प्रिय के कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी एवं डिजिटल बनाने के साथ निगम की आय बढ़ाने, व्यय कम करने, स्वच्छता एवं सीवर व्यवस्था मजबूत करने तथा जलभराव की समस्याओं के निराकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों से निगम की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। नगर निगम में संपत्ति कर नामांतरण की प्रक्रिया ई-नगरपालिका पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की गई है। इससे पूर्व संचालित ऑफलाइन फाइल प्रक्रिया के स्थान पर पारदर्शी एवं तेज व्यवस्था लागू हुई है। वहीं संपत्ति कर वसूली भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023-24 में 92 करोड़ रुपये की वसूली के मुकाबले वर्ष 2024-25 में 106 करोड़ तथा वर्ष 2025-26 में 116 करोड़ रुपये की वसूली हुई।

एनर्जी ऑडिट से विद्युत व्यय में बड़ी बचत की तैयारी
नगर निगम के विद्युत व्यय को कम करने के लिए व्यापक एनर्जी ऑडिट कराया गया है। इसके तहत 3600 एलटी एवं 17 एचटी कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई की जा रही है, जिसका लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे वर्तमान में लगभग 12 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की विद्युत बचत हो रही है। एनर्जी ऑडिट पूर्ण होने के बाद विद्युत बिल में न्यूनतम 20 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की कमी आने का अनुमान है।

कचरे के पहाड़ रोकने के लिए फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट
शहर में कचरे के ढेर बनने से रोकने के लिए फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया गया है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 300 मीट्रिक टन कचरे का निष्पादन हो रहा है। आगामी दो माह में इसकी क्षमता बढ़ाकर 600 मीट्रिक टन प्रतिदिन किए जाने का लक्ष्य है। विशेष बात यह है कि इसके लिए निगम पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था होगी और मजबूत
स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग 30 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन खरीदे जा चुके हैं तथा 39 और वाहनों का क्रय आदेश जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। 50 से अधिक कर्मचारियों के इंक्रीमेंट रोकने, सेवा समाप्ति सहित अन्य कार्रवाई की गई है।

स्ट्रीट लाइट व्यवस्था अब निगम के सीधे नियंत्रण में
शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को स्मार्ट सिटी के माध्यम से संचालित व्यवस्था से निगम स्तर पर लाने की दिशा में कार्य किया गया है। पूर्व में एचपीएल कंपनी द्वारा किया जाने वाला संधारण अब निगम के सीधे नियंत्रण में आने से शिकायतों के निराकरण एवं व्यवस्था में सुधार हुआ है।

सीवर व्यवस्था में बड़ा बदलाव, निगम स्वयं संभालेगा संधारण
सीवर समस्याओं के स्थायी निराकरण के लिए नगर निगम ने दो सुपर सकर मशीनें खरीदी हैं तथा 94 समस्याग्रस्त स्थान चिन्हित किए गए हैं। परिषद के ठहराव के अनुसार ठेकेदार आधारित व्यवस्था समाप्त कर निगम स्तर से सीवर संधारण की तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रथम चरण में 25 अगस्त से 10 वार्डों में व्यवस्था लागू होगी। इसके अलावा 22 डीसिल्टिंग मशीनों का कार्यादेश जारी किया गया है। आगामी दो माह में पूरे शहर में निगम स्तर से सीवर संधारण लागू करने की योजना है।

जलभराव से राहत के लिए 140 स्थानों पर कार्य
विगत वर्ष चिन्हित 227 जलभराव वाले स्थानों में से बजट उपलब्धता के अनुसार 140 स्थानों पर आवश्यक कार्य कराए जा चुके हैं। शेष स्थानों पर भी कार्य जारी है। जल निकासी को मजबूत करने के लिए 77 नालों को स्वीकृति दी गई है।

निगम की आय बढ़ाने के लिए नए स्रोत विकसित
नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए भवन अनुज्ञा में सुधार शुल्क का प्रावधान जोड़े जाने की कार्रवाई की गई है, जिससे अनुमानित रूप से कम से कम 10 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त आय की संभावना है। निगम की खाली दुकानों एवं संपत्तियों को लीज अथवा किराए पर देने की कार्रवाई भी की गई है। वहीं जलकर की दरों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप करने का प्रस्ताव परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

हुरावली और सागरताल में कमर्शियल प्रोजेक्ट से 300 करोड़ की संभावित आय*
हुरावली एवं सागरताल की भूमि पर बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट स्वीकृत कराए गए हैं। आवश्यक अनुमतियां प्राप्त होने के बाद निविदा प्रक्रिया की तैयारी है। परियोजनाओं के क्रियान्वयन से नगर निगम को लगभग 300 करोड़ रुपये की संभावित आय होने का अनुमान है।

प्रमुख विकास परियोजनाओं को मिली गति
आयुक्त संघ प्रिय के कार्यकाल में विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी गति मिली है। फूटी कॉलोनी आवास परियोजना पूर्ण हो चुकी है और हितग्राहियों को अधिपत्य देने की प्रक्रिया जारी है। मोती महल म्यूजियम का सिविल कार्य पूर्ण हो चुका है तथा कलाकृतियां स्थापित की जा रही हैं। नवीन परिषद भवन का कार्य अक्टूबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। थीम पार्क, द्वार एवं इंडस्ट्रियल म्यूजियम का कार्य पूर्ण कराया गया है। मल्टीलेवल कार पार्किंग का कार्य सितंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है, जबकि कन्वेंशन सेंटर को फरवरी 2027 से आमजन के लिए खोलने की तैयारी है।

ई-ऑफिस और ई-अटेंडेंस से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल बदलाव
नगर निगम में ई-ऑफिस एवं ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई है। इससे कार्यालयीन कार्यप्रणाली पेपरलेस, पारदर्शी और अधिक जवाबदेह हुई है। आयुक्त संघ प्रिय के कार्यकाल में डिजिटल व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन, आय के नए स्रोत, व्यय में कमी तथा नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर एक साथ काम किया गया है। आगामी समय में इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहर की मूलभूत सुविधाओं और निगम की आर्थिक क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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