व्हाईट के कोर ग्रुप में 120 से अधिक, लेकिन सब कागजी निकले
ग्वालियर। मप्र चेंबर आफ कामर्स के चुनावों के लिये व्हाईट हाउस के कोर ग्रुप में हाउस के सर्वेसर्वा अरविंद अग्रवाल, डा. वीरेन्द्र गंगवाल और जीएल भोजवानी ने 120 से भी अधिक लोग समय समय पर शामिल किये, लेकिन व्हाईट हाउस का यह कोर ग्रुप कागजी निकला। इस कोर ग्रुप के सदस्य अध्यक्ष से लेकर संयुक्त अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर मतदाताओं को प्रभावित ही नहीं कर पाये।
खबर तो यह है कि कोर ग्रुप के सदस्य व्हाईट हाउस की पार्टियों में ही दिखते थे, यह कभी प्लानिंग व प्रचार में भी नहीं दिखे। जिस कारण व्हाईट हाउस चुनावी पीक सीजन में तीनों प्रमुख पदों पर कमजोर होता चला गया।
विनोद जैन व सुनील सन्नी के साथ छलावा हुआ
व्हाईट हाउस के संयुक्त अध्यक्ष पद पर विनोद जैन व उपाध्यक्ष पद पर सुनील अग्रवाल सन्नी को ढूंढकर लाया गया था और उन्हें चुनाव लड़ने के लिये मना मना कर तैयार भी किया गया था, लेकिन व्हाईट हाउस के कर्ताधर्ता केवल अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पारस जैन के प्रचार में ही लगे रहे। जिस कारण यह दोनों पत्याशी शुरू से ही अपने विपक्षी क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशियों के सामने फिसडडी हो गये।
दोनों दीपक व बाबा खुद के बल पर जीते
व्हाईट हाउस ने सचिव प्रत्याशी दीपक अग्रवाल, सहसचिव प्रत्याशी दीपक पमनानी व कोषाध्यक्ष प्रत्याशी मनोज अग्रवाल बाबा को भी तबज्जो नहीं दी। यह तीनों प्रत्याशी अपने स्वयं के बूते व मेहनत पर ही बढ़त बना सकें। दीपक अग्रवाल अपने काम के बूते पर व दीपक पमनानी एवं मनोज अग्रवाल बाबा अपनी मित्रमंडली के सहयोग से ही जीत पाये। पूर्व सचिव व कैट के भूपेन्द्र जैन केवल दीपक पमनानी के लिये ही लगे। क्योंकि उनकी कैट की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। वहीं मनोज अग्रवाल बाबा व दीपक अग्रवाल के लिये उनके एक दो अप्रत्यक्ष मित्रों ने मदद कर चुनाव की कहानी ही पलट दी।