बंजर जमीन पर आई जैविक खेती की बहार, जैविक क्रांति के पर्याय बने कृषक प्राण सिंह
(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर । जिले के विकासखंड डबरा के ग्राम बिलौआ निवासी कृषक प्राण सिंह ने अपनी अथक मेहनत, दूरदर्शिता व सरकारी प्रोत्साहन की बदौलत जैविक खेती के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। उनकी ख्याति अब केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं है, मध्यप्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों के किसानों के बीच उनकी एक सफल जैविक एवं प्राकृतिक कृषक के रूप में पहचान बनी हैं। प्राण सिंह ने अपने कृषि फार्म में फलों व फसलों की कई किस्में ईजाद की हैं। इनमें से अमरूद की दो किस्में पेटेंट हो चुकी हैं। उनसे प्राकृतिक खेती के गुर सीखने देशभर के किसान एवं की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी प्राण सिंह के कृषि फार्म पर आते रहते हैं।
प्राण सिंह बताते हैं कि जिस जमीन पर आज उनका हरा-भरा बाग लहलहा रहा है, वह जमीन कभी पूरी तरह बंजर और अनुपजाऊ थी। उन्होंने यह जमीन साल 1984 में खरीदी थी। शुरूआती कुछ वर्षों में की गई कड़ी मेहनत व धैर्य की बदौलत उन्हें मनचाहा उत्पादन मिलना शुरू हुआ। प्राण सिंह कहते हैं कि इस दौरान कई बार ऐसा भी लगा कि शायद उन्हें जैविक खेती में सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन हार नहीं मानी और अपने संकल्प पर अडिग रहे। जाहिर है सफलता खुद चलकर हमारे फार्म तक आई। प्राण सिंह कहते हैं कि उन्हें कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों का बहुमूल्य मार्गदर्शन मिला। उनकी सलाह पर शुरूआत में अपने खेत के एक हिस्से में जैविक खेती की शुरुआत की। धीरे-धीरे नई तकनीकों को अपनाया और अपनी पूरी कृषि भूमि को जैविक खेती में परिवर्तित कर दिया। आज प्राण सिंह के फार्म पर अमरूद, आम, चीकू, कटहल और जामुन जैसे कई फलदार पौधे जैविक तरीके से तैयार हो रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि अमरूद की दो नई किस्में, "बिलौआ-22" और "बिलौआ रेड" का विकास है। इसके अतिरिक्त, वे जामुन की एक नई किस्म के पंजीकरण की प्रक्रिया में भी लगे हुए हैं, जो उनके नवाचार और कृषि अनुसंधान के प्रति समर्पण को दर्शाता है। बिलौआ स्थित प्राण सिंह का कृषि फार्म मध्यप्रदेश ही नहीं, देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले किसानों के लिए एक प्रशिक्षण और प्रेरणा का केन्द्र बन गया है। अब तक लगभग 40 से 50 हजार किसान उनके फार्म पर प्रशिक्षण लेकर जैविक खेती की तकनीक सीख चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जैविक खेती के क्षेत्र में प्राण सिंह के प्रयासों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री द्वारा प्राण सिंह का सम्मान उनके अथक परिश्रम और जैविक खेती के प्रति दिए गए योगदान के लिये किया गया।