मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त और प्रभावी कार्रवाई करेंः एसएसपी धर्मवीर
- एनडीपीएस एक्ट के अपराधों में गुणात्मक विवेचना के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित
ग्वालियर। मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए पारंपरिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। प्रत्येक प्रकरण में तकनीकी एवं डिजिटल साक्ष्यों को विवेचना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, जिससे अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में मजबूत एवं प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें। मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया। यह निर्देश वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने रविवार को एनडीपीएस एक्ट के अपराधों में गुणात्मक विवेचना के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला में दिये।
कार्यशाला में विवेचकों को एनडीपीएस एक्ट 1985 के प्रावधानों, 52ए की कार्यवाही, घटना स्थल पर वीडियो ग्राफी, टेस्टिंग किट का उपयोग करना, वाणिज्यक मात्रा के अपराधों में आर्थिक अनुसंधान करने एवं एनडीपीएस के आरोपीगणों के विरुद्ध पीआईटी एनडीपीएस के तहत कार्यवाही किये जाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में कानूनी प्रावधानों तथा अन्य विषयों पर जानकारी अपर जिला लोक अभियोजक विशेष न्यायालय नारकोटिक्स धर्मेन्द्र शर्मा द्वारा प्रदाय की गई। अति पुलिस अधीक्षक सुमन गुर्जर ने अपने अनुभवों को साझा करते हुये समस्त विवेचकों को न्यायालयीन प्रकिया के दौरान साक्ष्य देते समय अपनाई जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आगामी समय में 15 जुलाई से चलाये जाने वाले अभियान ‘‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’’ के दौरान जनजागरूकता के साथ ही मादक पदार्थाे की रोकथाम हेतु कार्यवाही किये जाने हेतु अभियान को अधिक सफल बनाना होगा। प्रशिक्षण में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी आरएफएसएल ग्वालियर डाॅ. विनोद ढींगरा ने विवेचना में हो रही त्रुटियों, 52ए की कार्यवाही एवं मादक पदार्थाे को कई प्रकार एवं उनकी पहचान आदि संबधी आवश्यक जानकारी प्रदान की।