कूनो नेशनल पार्क में चीतों के बाद अब कैराकल की दस्तक, कैमरा ट्रैप में दिखा,सीएम डॉ मोहन यादव ने ट्विट कर दी जानकारी

(श्योपुर से आशीष चौरसिया की रिपोर्ट)
देश और दुनिया में चीतों के लिए प्रसिद्ध हो चुके कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चाओं में आ चुका है. यहां एक दुर्लभ वन्यजीव के प्रमाण मिले हैं. कैमरा ट्रैप के संरक्षण के दौरान दुर्लभ और रहस्मयी जंगली बिल्ली प्रजाति का कैराकल कैमरे में कैद हुआ है। यह दृश्य न केवल वन विभाग के के लिए बल्कि वन्यजीव क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है. सीएम डॉ मोहन यादव ने X पोस्ट पर जानकारी सांझा करते हुए बताया कि हाल ही में हुए कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण में कूनो नेशनल पार्क में वर्षों बाद दुर्लभ कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है.यह न केवल वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता है, बल्कि कूनो के समृद्ध होते इकोसिस्टम का भी प्रमाण है।
जानकारी के मुताबिक कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लगाए गए कैमरा ट्रैप कैमरों के जरिए हाल ही में एक दुर्लभ कैराकल की तस्वीर रिकॉर्ड की गई है.कैराकल एक अत्यंत दुर्लभ जंगली बिल्ली प्रजाति है.जो भारत में बहुत कम स्थानों पर दिखाई देती है.इसकी पहचान इसके लंबे काले कानों और फुर्तीले शिकारी स्वभाव के कारण होती है.कूनो नेशनल पार्क पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अफ्रीकी चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम के बाद यहां जैव विविधता को लेकर लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.अब दुर्लभ कैराकल का कैमरे में कैद होना इस क्षेत्र की समृद्ध वन्यजीव विरासत को और अधिक मजबूत करता है।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने X पोस्ट शेयर कर कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रकृति एक बार फिर संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के महत्व की याद दिला रही है। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क में किए गए कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान दुर्लभ कैराकल कैमरे में कैद हुआ है.जो कई वर्षों बाद इस क्षेत्र में इसकी वापसी का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित प्रोजेक्ट चीता केवल चीतों के पुनर्वास तक सीमित नहीं है.बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का कार्य कर रहा है. इससे मध्य प्रदेश में विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित और बेहतर आवास विकसित हो रहे हैं| उन्होंने कहा कि कैराकल की वापसी इस बात का प्रमाण है कि किसी एक प्रमुख प्रजाति के संरक्षण के लिए किए गए प्रयास पूरे इकोसिस्टम को लाभ पहुंचाते हैं.कूनो राष्ट्रीय उद्यान आज वन्यजीव संरक्षण के एक सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है।


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