इस क्रांतिकारी बदलाव के पीछे स्कूल प्रबंधन की एक खास रणनीति रही। स्कूल प्रबंधन सरकार की मंशा के अनुरूप बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिये खास प्रयास किए। विद्यालय के प्राचार्य संजीव शर्मा बताते हैं कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक के हर 30-40 बच्चों पर एक शिक्षक को 'मेंटर' (मार्गदर्शक) नियुक्त किया गया। इन शिक्षकों ने सिर्फ क्लासरूम तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बच्चों के घरों तक का सफर तय किया। शिक्षकों ने घर-घर जाकर लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों व उनके पालकों से सीधा संवाद किया। साथ ही उनके सामाजिक-पारिवारिक परिवेश को समझकर पढ़ाई में आने वाली हर बाधा को दूर किया। इससे बच्चों व पालकों में एक नया विश्वास पैदा हुआ। शिक्षकों के इस भागीरथी प्रयास और बच्चों की मेहनत का ही नतीजा है कि देखते ही देखते स्कूल की तस्वीर बदल गई। कभी खाली रहने वाली कक्षाएं अब 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति से गुलजार रहने लगी हैं। यही नहीं, सत्र 2024-25 के परीक्षा परिणामों में अभूतपूर्व उछाल आया है– वर्ष 2022-23 की तुलना में कक्षा 10वीं के रिजल्ट में 40 प्रतिशत से अधिक और कक्षा 12वीं के रिजल्ट में 60 प्रतिशत से अधिक की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
सबसे गौरवशाली बात यह रही कि इस बार कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। इस सुखद बदलाव में सरकार द्वारा सांदीपनि स्कूल में उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब व स्मार्ट कक्षाओं सहित निजी स्कूलों से भी बेहतर अधोसंरचना और सुयोग्य शिक्षकों की अथक मेहनत का प्रमुख योगदान है। ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल की इस सफलता पर विद्यालय परिवार को प्रतिष्ठित मंच से विशेष रूप से सम्मानित किया जा चुका है। सांदीपनि स्कूल की यह गौरवगाथा साबित करती है कि प्रदेश सरकार की 'सीएम राइज' योजना ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें नया आसमान देने का अपना संकल्प पूरी मजबूती से निभा रही है।