सिवनी. मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी का खेल फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन राज्य के अलग-अलग जिलों में से रिश्वत के कई मामले सामने आ चुके है। हालांकि लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई कर अधिकारी-कर्मचारियों को रंगे हाथ पकड़ा है। लेकिन, बावजूद इसके घूसखोरी पर लगाम लगती दिख नहीं रही है। ताजा मामला एमपी के सिवनी जिले का है। जहां दफ्तर में 10,000 रुपए रिश्वत लेते बाबू को पकड़ा है। जीवन निर्वाह भत्ता जारी करने के एवज में रिश्वत मांगी थी।
दरअसल, सिवनी निवासी देवेंद्र कुमार सिरसाम ने जबलपुर लोकायुक्त को शिकायत की थी। बताया कि वह जिले के धनोरा विकासखंड के सुनवारा क्षेत्र में स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में चपरासी के पद पर पदस्त है। लेकिन, इससे पहले वह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भीमगढ़ विकासखंड छपारा में पदस्त थे। जहां से किसी कारण उन्हें 14 महीने के लिए निलंबित किया गया था। आवदेक ने बताया कि निलंबन के 14 महीने उसके 1.65 लाख रुपए के जीवन निर्वाह भत्ते का हकदार था।
यह राशि निकलवाने के लिए वह धनोरा विकासखंड अधिकारी कार्यालय में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 अरुण कुमार कमरे से मिला। आरोप है कि सहायक ने भत्ता जारी करने के बदले पहले 32 हजार रुपए रिश्वत मांगी। इसके बाद आवेदक ने इसकी शिकायत जबलपुर लोकायुक्त से की। शिकायत के बाद सहायक 25 हजार रुपए रिश्वत लेने पर तैयार हो गया।
मामले में शिकायत पर लोकायुक्त डीजीपी योगेश देशमुख के निर्देश पर लोकायुक्त डीआईजी मनोज सिंह के नेतृत्व में ट्रैप कार्रवाई की गई। बुधवार को टीम ने विकासखंड कार्यालय पहुंचकर आरोपी अरुण कुमार कमरे को 10000 रूपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 की धारा-7,13(1)B, 13(2) के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है।
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