श्रद्धावान् लभते ज्ञानम् — श्रद्धा, समर्पण और कर्मयोग का दिव्य संदेश


ग्वालियर में 7 दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ का समय बढ़ाकर साप्ताहिक हुआ, अब 16 मई तक चलेगा 

ग्वालियर। भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेश के प्रचार-प्रसार हेतु आयोजित पंच दिवसीय “गीता ज्ञान यज्ञ (कर्मयोग का तत्त्व)” इन दिनों ग्वालियर में अत्यंत भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हो रहा है। सिद्ध पीठ श्री गंगा दास की बड़ी शाला, लक्ष्मी बाई कॉलोनी, पड़ाव, लश्कर,  मैं किन्तु श्रद्धालुओं की अत्यधिक आस्था, भक्ति एवं आग्रह को देखते हुए पूरण बैराठी पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामसेवक दास जी महाराज ने कार्यक्रम की अवधि बढ़ाकर 15 मई 2026 तक कर दी है। 15 मई तक प्रतिदिन सायंकाल 4 बजे से 7 बजे तक गीता स्वाध्याय एवं प्रवचन का क्रम जारी रहेगा।
13 मई एकादशी को प्रातःकाल 9 बजे से सम्पूर्ण अखण्ड गीता पाठ और हवनका आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ, जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया। आयोजन समिति ने बताया कि 16 मई को प्रातःकाल हवन,ग्वालियर में आयोजित इस दिव्य आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर गीता के गूढ़ रहस्यों का श्रवण कर रहे हैं।
यज्ञ के पंचम दिवस पर कथा व्यास डॉ. विष्णु नारायण तिवारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय के श्लोक संख्या 34 से 42 तक की अत्यंत भावपूर्ण, गूढ़ एवं व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत की। इस अवसर पर “श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्” विषय को केंद्र में रखते हुए उन्होंने कहा कि बिना श्रद्धा के न तो ज्ञान प्राप्त हो सकता है और न ही आत्मिक उन्नति संभव है। श्रद्धा ही मनुष्य को गुरु, शास्त्र और ईश्वर से जोड़ती है तथा जीवन में सच्चे ज्ञान का प्रकाश करती है।
उन्होंने गीता के श्लोक —
“श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः”
का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धावान, संयमी और साधना में तत्पर होता है, वही वास्तविक ज्ञान को प्राप्त करता है। ज्ञान मनुष्य के भीतर के अज्ञान, संशय और भय को समाप्त कर उसे धर्म, कर्तव्य और आत्मबोध के मार्ग पर अग्रसर करता है।
डॉ. तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का मानव बाहरी उपलब्धियों के पीछे भाग रहा है, किन्तु आंतरिक शांति और आत्मिक संतोष केवल आध्यात्मिक ज्ञान से ही प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए जीवन जीने की कला है। इसमें कर्म, भक्ति, ज्ञान और आत्मसंयम का अद्भुत समन्वय है।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने गुरु-शिष्य परम्परा की महत्ता का विशेष रूप से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को स्पष्ट संदेश दिया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए विनम्रता, सेवा और प्रश्न करने की भावना आवश्यक है। गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ही आत्मज्ञान का द्वार खुलता है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और एकाग्रता के साथ प्रवचन का श्रवण किया। वातावरण “हरे कृष्ण”, “जय श्रीकृष्ण” और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय बना रहा। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, विद्यार्थी एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित होकर गीता के संदेश को आत्मसात कर रहे हैं।
आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि यह पंच दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ मूल रूप जिसमें जिले भर से गीता प्रेमियों, कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
इस अवसर पर कथा व्यास डॉ. विष्णु नारायण तिवारी ने कहा कि गीता का संदेश केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। यदि मनुष्य निष्काम कर्म, संयम, श्रद्धा और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करे तो उसका जीवन स्वतः सफल और सार्थक बन सकता है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से इंजीनियर आर.पी. माहौर, अलकेश त्रिपाठी, सीताराम शर्मा, डॉ. एम.एल. शर्मा, कालीचरण शर्मा, इंजीनियर एस.के. गुप्ता एवं नरेंद्र कुमार सांवला सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन के अंत में जिला संयोजक अभिषेक द्विवेदी ने सभी श्रद्धालुओं एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए ग्वालियरवासियों से सपरिवार कार्यक्रम में सम्मिलित होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों की स्थापना एवं भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं।

posted by Admin
4

Advertisement

sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
Get In Touch

Padav, Dafrin Sarai, Gwalior (M.P.)

98930-23728

sandhyadesh@gmail.com

Follow Us

© Sandhyadesh. All Rights Reserved. Developed by Anuj Mathur

<1-------Google-aNALY-------->