राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी और ग्रामीण विकास पर सेमिनार संपन्न
ग्रामीण विकास और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी 
महारानी लक्ष्मी बाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय ग्वालियर में आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी और ग्रामीण विकास पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें प्रोफेसर कुसुम भदोरिया, प्रोफेसर रवि रंजन, डॉ विभा दूरवार, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. अनीता मेवाफरोश, डॉ. ज्योत्सना राजपूत और डॉ शशि कला राठौर ने अपने विचार व्यक्त किए । प्रोफेसर कुसुम भदोरिया बताया कि
ग्रामीण विकास और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी का एकीकरण भारत की 65% से अधिक आबादी के जीवन स्तर को सुधारने और आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक है. इस पल में प्रमुख राष्ट्रीय पहले जैसे आर. यू. टी. ए. जी. रा. ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह.,स्मार्ट कृषि नवीनीकरण ऊर्जा, सौर ऊर्जा और आईसीटी सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके कम लागत वाले आवास बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं एवं स्थानीय रोजगार सृजन में किया जा रहा है. प्रोफेसर रवि रंजन ने कहा कि ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी का एकीकरण शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की खाई को काटने में मदद कर रहा है. सतत और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकी के विकास में ग्रामीण क्षेत्र में विकसित हो रहे हैं.डॉ विभा दूरवार ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने और सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने में सक्षम बनाया है. डॉ दीपक शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा एक दूसरे से गहरे जुड़े हैं कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्वांटम तकनीकी साइबर सुरक्षा और रक्षाबंधन शक्ति और भू राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है. भारत स्वदेशी तकनीकी क्षमता सेमी कंडक्टर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. डॉ. अनीता मेवाफरोश ने बताया कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी ग्रामीण विकास की आधारशिला बन चुकी है। इससे गांव आत्मनिर्भर बन रहे हैं और लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। यदि तकनीक का सही उपयोग किया जाए, तो ग्रामीण भारत का समग्र विकास तेजी से संभव है। डॉ ज्योत्सना राजपूत बताया कि प्रौद्योगिकी और पर्यावरण का अंतर संबंध राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से नवीनीकरन ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए तकनीकी उपयोग पर तेजी से कार्य हो रहा है.
पवन और जल विद्युत के माध्यम से ऊर्जा की जरूरत को पूरा करना वायु जल और मृदा के प्रबंधन के लिए उन्नत प्रणालियों जैसे गतिविधियां बहुत कारगार सिद्ध हो रही है । डॉ शशि कला राठौर ने कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार और संचार के क्षेत्र में तेजी से विकास संभव हुआ है।