उल्लेखनीय है कि जब से प्रशासन द्वारा नियुक्त प्रशासक ने पदभार संभाला है उसके बाद से ही मंदिर पर अपना समय देने वाले श्रद्धालुओं तथा प्रशासक और प्रशासन के बीच कुछ मुददों को लेकर टकराव बना हुआ है। वहीं मंदिर में प्रशासक द्वारा अपने लोगों को नियुक्त करना, नये कटटे छपवा कर पैसों की अवैध वसूली करना, मंदिर के पुजारियों को परेशान करने से आम श्रद्धालुओं में रोष है। वहीं बडे कार्यक्रमों को लेकर भी पैसों की उगाही करने की सूचनाओं ने भी श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासक में टकराव होना शुरू हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक मंदिर प्रशासक जो कि एक जाने माने समाज सेवी है ने जब से पदभार संभाला है उसके बाद से उन्होंने अपने कुछ मातहतों को मंदिर में दखल दिलवाकर व्यवस्थाओं को बिगाडना शुरू कर दिया है। अब जब दान में प्याउ बनाने के पैसे मिले तो उससे दुकान का निर्माण क्यों कराया जा रहा है। वहीं वाहनों की पूजा के लिए भी प्रशासक के वंदे ही वसूली कर रहे है। बताया जाता है कि प्रशासक के पटठों द्वारा पुजारियों के बीच मनमुटाव करवा कर मारपीट भी करवा रहे है। इससे मंदिर में अभद्रता होने से श्रद्धालु परेशान हो रहे है।
सूत्र बताते है कि अचलेश्वर न्यास द्वारा सैकडों युवक युवतियों के विवाह करवाये लेकिन नये प्रशासक ने पैसे लेकर विवाह संपन्न कराये इससे लोगों में काफी रोष है। वहीं बडे भंडारों में भी सडी सब्जियां परोसे जाने से लेकर भंडारे में सामान की कमी होने से भी नियमित श्रद्धालु खासे नाराज है। मंदिर पर रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि जिला प्रशासन को न्यास के चुनाव करवाकर नई समिति को प्रबंधन सौंपे जिससे मंदिर में ना तो भ्रष्टाचार हो सके और ना ही किसी पर आरोपी प्रत्यारोप लगें।
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