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*22 अप्रैल 1870 में जन्मे महान दार्शनिक लेनिन की जयंती पर संगोष्ठी संपन्न

*महान लेनिन वैज्ञानिक समाजवाद के संस्थापक*
                         *भा क पा* 

ग्वालियर । दुनिया के महान दर्शनिक और वैज्ञानिक समाजवाद के निर्माताओ को जब याद किया जाता है तो महान व्लादिमीर लेनिन का नाम सबसे अग्रणी और सर्वोच्च शिखर पर आता है ।
कॉमरेड लेनिन की जन्म जयंती पर आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ग्वालियर जिला पार्टी कार्यालय सरवटे भवन हजीरा ग्वालियर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में उपस्थित साथियों को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य कॉमरेड कौशल शर्मा एडवोकेट , कॉम रविंद्र सरवटे एडवोकेट , कॉम शैलेश परमार (जिला सहसचिव), कॉम प्रकाश वर्मा,कॉम हरिशंकर माहौर ने कहा की कॉमरेड व्लादिमीर लेनिन का जन्म 22 अप्रैल 1870 को शहर सिमवीस्कर के एक शिक्षित परिवार में हुआ ,उन्होंने उच्च अध्ययन तथा वकालत के पेशे में जिम्मेदारी वाले जीवन को शुरू किया। पढ़ाई के दौरान ही तार्किक बुद्धि के होने के कारण वे क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हुए। कानून की पढ़ाई के दौरान वे मार्क्सवादी विचारों से प्रभावित हुए। क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उन्हें विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया और बाद में साइबेरिया निर्वासित कर दिया। 
कॉम लेनिन के बड़े भाई अलेक्सांद्र को क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने के कारण जारशाही राज सत्ता द्वारा मौत की सजा दी गई (उस समय उनकी उम्र मात्र 13 साल थी) और बड़ी बहन को जेल में डाल दिया गया, इन घटनाओं से उनके दिलों दिमाग में गहरा असर डाला। कॉम लेनिन का मानना था की क्रांति करने के लिए मजदूरो की एक क्रांतिकारी पार्टी का होना जरूरी है । उन्होंने पार्टी संगठन खड़ा कर मार्क्सवादी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए मजदूर वर्ग के महान नेता शिक्षक और दुनिया की पहली सफल मजदूर क्रांति के नेता बने। उनके नेतृत्व में पहले समाजवादी राज्य की स्थापना हुई जिसने दुनिया को दिखा दिया कि शोषण उत्पीड़न के बंधनों से मुक्त होकर मेहनतकश जनता कैसे चमत्कार कर सकती है। महान क्रांतिकारी सोवियत संघ के संस्थापक व्लादिमीर लेनिन ने शोषण मुक्त दुनिया की स्थापना के महान लक्ष्य पथ पर अग्रसर करोड़ों क्रांतिकारीयो को जिस तरह प्रेरित किया, वह इतिहास का स्वर्ण अध्याय है। लेनिन भारत के महान क्रांतिकारी भगत सिंह के आदर्श थे। 
लेनिन के नेतृत्व में हुई सोवियत क्रांति ने यह विश्वास विश्व के अंदर स्थापित किया कि शोषणकारी व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है और मेहनतकशों की सत्ता की स्थापित हो सकती है।
आज की संगोष्ठी सभा में कॉम कौशल शर्मा एडवोकेट, कॉम रवीन्द्र सरवटे एडवोकेट,कॉम शैलेश परमार, कॉम अनवर खान,कॉम बारेलाल पाल,कॉम प्रकाश वर्मा,कॉम हरिशंकर माहौर, कॉम जालिम सिंह, कॉम भूपेश पलरिया, कॉम आनंद ठाकुर, कॉम प्रशांत कुमार,कॉम आसाराम रायकवार,कॉम अंजलि परमार, कॉम ज्ञान देवी वर्मा,कॉम गुड्डी सिंह, कॉम लक्ष्मी जाटव आदि बड़ी संख्या में साथियों ने भाग लिया। 

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