भक्ति या जुनून: 25 वर्षों से गौ सेवा में समर्पित दीपक कल्लू महाराज बने मानवता की जीवंत मिसाल

दिनारा। इसे भक्ति कहें या सच्चा जुनून—गौ माता की सेवा में बीते 25 वर्षों से निरंतर समर्पित दीपक कल्लू महाराज आज पूरे क्षेत्र में आस्था, करुणा और मानवता का पर्याय बन चुके हैं। दिन-रात बिना किसी स्वार्थ के गौ सेवा में तत्पर रहने वाले दीपक कल्लू महाराज को लोग स्नेहपूर्वक “गौ सेवा की 108 आपातकालीन सेवा” भी कहते हैं, क्योंकि संकट की घड़ी में वे हमेशा सबसे पहले पहुंचते हैं।हाल ही में रात्रि के समय श्री कृष्णा चौराहे के पास हाईवे किनारे एक हृदयविदारक घटना सामने आई। सड़क किनारे खुली पड़ी नाली में एक गाय का मासूम बच्चा गिर गया। कड़ाके की ठंड और अंधेरी रात के कारण उसकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। स्थानीय लोगों ने जब इस घटना की सूचना दीपक कल्लू महाराज को दी, तो उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। ठंड, समय और अपनी परवाह किए बिना वे तुरंत मौके पर पहुंचे।
स्थिति को देखते हुए दीपक कल्लू महाराज ने ठंड की चिंता किए बिना अपने कपड़े उतारे और स्थानीय लोगों की सहायता से नाली में उतर गए। बेहद कठिन और जोखिम भरी परिस्थिति में उन्होंने साहस और धैर्य का परिचय देते हुए गाय के बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते की गई इस त्वरित और निस्वार्थ कार्रवाई से उस बेजुबान की जान बच सकी। बाहर निकलते ही गाय के बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उसकी देखभाल की गई।
इस घटना के बाद क्षेत्र में दीपक कल्लू महाराज की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। लोग उनकी तुलना सच्चे सेवक और कर्मयोगी से कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आज के समय में जहां लोग अपने हितों में ही उलझे रहते हैं, वहीं दीपक कल्लू महाराज जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति मंदिरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि पीड़ित और असहाय की सेवा में ही ईश्वर की सच्ची आराधना है।
दीपक कल्लू महाराज बीते 25 वर्षों से न केवल गौ सेवा बल्कि ग्राम सेवा में भी निरंतर सक्रिय हैं। घायल, बीमार या संकट में फंसी गायों की सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचते हैं। बिना किसी सरकारी सहायता या प्रचार के वे अपने संसाधनों से सेवा कार्य करते आ रहे हैं। उनका जीवन त्याग, सेवा और समर्पण की अद्भुत मिसाल है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि दीपक कल्लू महाराज की निस्वार्थ सेवा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। उनकी यह सोच कि “जब तक सांस है, तब तक सेवा है” उन्हें दूसरों से अलग बनाती है। सचमुच, दीपक कल्लू महाराज की गौ सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि मानवता और करुणा की जीवंत कहानी है, जो समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रही है।

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