एआई के सही उपयोग के लिये लोगों को जागरूक करें


(पं कृष्णकान्त तिवारी, समाजसेवी लेखक)

*एआई (आर्टीफिशियल एंटेलीजेंस)*- आज के डिजीटल युग में एआई हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। मोबाइल असिस्टेंट से लेकर बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और उद्योग तक-हर क्षेत्र में एआई का प्रभाव दिखाई देता है लेकिन जितना बड़ा यह आविष्कार है उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी इसके सही उपयोग की भी है। आइये पहले एआई को समझते हैं एआई एक ऐसी तकनीक है जो मशीनों को सोचने, सीखने, और निर्णय लेने की क्षमता देती है। इसका उद्देश्य इंसान की तरह समझदार प्रणाली बनाना है ठीक वैसे जैसे एक इंसान करता है। जब हम गूगल मैप्स से रास्ता ढ़ूॅढते हैं या यूटयूब, आनलाइन बैंकिंग, टैफिक कंट्रोल आदि पर एआई काम करता है जो किसी भी कार्य को सेकेण्डों में कर देता है। वाॅइस असिस्टेंट हमारी आवाज पहचानकर आदेश का पालन करते हैं। इससे हम किसी इंसान के जैसे बात कर अपनी समस्या बता सकते हैं यह आपकी सोच के हिसाब से कार्य करने में सक्षम है आप अपनी समस्या को अपने दोस्त की तरह बतायेगे और एआई आपको ठीक वैसे ही जबाब देकर आपकी समस्या को हल करने की कोशिश करेगा। उदाहरण के तौर पर आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर हमे किसी फोटो का बैकग्राउण्ड नेचुरल रखना है तो हमे सिर्फ बोलना है और उस फोटो को अपलोड करना है एआई आपकी फोटो को तुरंत नेचुरल बैकग्राउण्ड के साथ बनाकर के दे देगा। इसके अलावा चैटबाॅट्स, फेस रिकग्रिशन, आटोमेटेड कारें और स्मार्ट हेल्थ सिस्टम ये सब आधुनिक एआई रूप हैं। एआई आधारित टूल्स काम को तेज और सटीक बनाते हैं। इसका उपयोग डेटा एनालिसिस से सही निर्णय लेने में मदद करती है। कलाकार, लेखक और शोधकर्ता एआई की मदद से अपनी कल्पनाओं को साकार कर रहे इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी और राहत कार्यों में एआई उपयोगी साबित हो रही है। एआई ने न केवल काम को आसान बनाया है बल्कि इंसान की सोच और रचनात्मकता को भी एक नई दिशा दी है।      
                                                            
*एआई का दुरूप्रयोग*- एआई जहाॅ लोगों के काम को आसान बनाने के लिये है वही कुछ असामाजिक तत्व इसका उपयोग करके सामाजिक हिंसा, साइवर अपराध, डाटा चोरी, डाटा निगरानी, फोटो विडीयो में एआई की मदद से बदलाव आदि में इसका दुरूप्रयोग करते हैं। एआई के बढ़ते प्रभाव से डाटा चोरी होने की सबसे ज्यादा संभावना बनती है। आप लोग देखते होंगे कि हम सभी किसी भी जानकारी को गूगल या किसी प्लेटफार्म पर सर्च कर रहे होते हैं तो उससे संबंधित लोगों के आपकेे पास फोन आने शुरू हो जाते हैं मतलब आपके डाटा से लेकर निजी जानकारी को चोरी करने के लिये अनेक कंपनियाॅ और ऐपस एआई की मदद लेते हैं। एआई से बनाए गये फेक वीडियो या झूठी सूचनाए समाज में गलत संदेश, अविश्वास तथा भ्रम फैलाने का कार्य करते हैं। यही कारण है कि अब लोग इसका उपयोग जातिवादी झगड़े, धर्म तथा दंगों के लिये कर रहे हैं। आप देख भी रहे होंगे कि आज कल सोशल मीडिया पर अनेक ऐसे फोटो वीडियो देखने को मिल जायेंगे जो सामाजिक मदभेद या जातिगत भतभेद को बढ़ा रहे हैं। ज्ञान की कमी की बजह से अधिकांशतः सभी युवा व वरिष्ठ उन वीडियो व फोटो की सच्चाई का पता किये उन्हें शेयर करते चले जाते हैं पर हमे सबसे पहले उनकी सच्चाई का पता करना चाहिए तभी उन्हें शेयर करना चाहिए। इसके साथ सामाजिक मतभेद को बढ़ावा देने वाली फोटो वीडियो को शेयर करने से बचना चाहिए। आज हर जगह जातिवाद है और आपसी मदभेद का विस्तार हो रहा तो उसके पीछे कही न कही सोशल मीडिया ही है। अगर एआई का उपयोग लालच, सत्ता या युद्ध के लिये हुआ तो यह मानव सभ्यता के लिये सबसे बड़ा खतरा है।

*सही उपयोग औरजागरूकता के उपाय*-
एआई के पास बुद्धि है लेकिन विवेक नहीं और विवेक ही इंसान की सबसे बड़ी पहचान है। हमें एआई को मानवता, नैतिकता और करूणा के मूल्यों से जोड़ना होगा। एआई टूल का उपयोग करने से पहले उसकी सीमायें जाचें तथा अपनी निजी जानकारी साझा करने से पहले सोचें। किसी भी एआई से बनाई गयी फोटो, वीडियो या डेटा को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता को जाॅचें। यदि एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता और शांति के लिये हुआ तो यही तकनीक आने वाले समय की सबसे बड़ी क्रांति होगी। सरकार को शिक्षा में एआई को शामिल कर स्कूलों और काॅलेजों में एआई की शिक्षा को अनिवार्य करना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इसका सही उपयोग समझ सके। इसके साथ ही सरकार और संस्थानों को डेटा की सुरक्षा तथा नागरिको की गोपनीयता के लिये कड़े नियम कानून लागू करने चाहिए ताकि एआई के दुरप्रयोग से बचा जा सके। सरकार द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर के लोगों को यह बताया जाये कि एआई का उपयोग कैसे करें और किन बातों से बचें। मेरा ऐसा मानना है कि सभी सोशल मीडिया के एकाउण्ट को आधार कार्ड से जोड देना चाहिए प्रत्येक आधार कार्ड से किसी भी प्लेटफार्म पर एक ही एकाउण्ट बने तथा उसका वेरीफिकेशन व पूर्णतः जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसके साथ ही किसी भी फोटो वीडियो को सोशल मीडिया एकाउण्ट पर अपलोड करते समय अपलोडकर्ता से तुरंत का फोटो वेरीफाइड होना चाहिए ताकि सत्यता की सीमा तय की जा सकें। एआई कोई खतरा नहीं एक अवसर है लेेकिन अगर हम इसे सही दिशा में और सही उद्देश्य से उपयोग करें। इसका सही उपयोग न केवल हमारे जीवन को आसान बनाएगा बल्कि समाज को भी प्रगतिशील  दिशा में आगे ले जाएगा। हमें यह समझना होगा कि मशीनें हमारी मदद के लिये हैं हमारा स्थान लेने के लिये नहीं। सही दिशा, नैतिक सोच और जागरूकता के साथ एआई हमारे भविष्य को और उज्जवल बना सकता है।

posted by Admin
46

Advertisement

sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
Get In Touch

Padav, Dafrin Sarai, Gwalior (M.P.)

98930-23728

sandhyadesh@gmail.com

Follow Us

© Sandhyadesh. All Rights Reserved. Developed by Anuj Mathur

<1-------Google-aNALY-------->