ग्वालियर। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में साउथ कल्चरल कमेटी द्वारा संस्थान के तुरारी परसिर स्थित इंडोर स्पोट्र्स एरीना में ‘बथुकम्मा सेलिब्रेशन-2026‘ उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में दक्षिण भारतीय लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मनमोहक छटा देखने को मिली। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सुंदरता और विविधता को जीवंत किया। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चैहान, आईक्यूएसी डायरेक्टर डाॅ. वानी अग्रवाल, डाॅ. गीतांजलि सुरंगे, डीन स्टूडेंट वेल्फेयर तृप्ति पाठक, काॅओर्डिनेटर्स प्रद्युम्न तिवारी, डाॅ. रंजीथ कुमार रेड्डी, अरुन राज, स्टूडेंट् कमेटी में रवि कुमार सहित विभिन्न विभागों के डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, बड़ी संख्या में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर और आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के इंडोर स्पोट्र्स एरीना में आयोजित ‘बथुकम्मा सेलिब्रेशन-2026‘ में मुख्य आकर्षण फूलों से सजी पारंपरिक बथुकम्मा संरचना रही। जहां मौसमी गुनुका, तंगेडु, गेंदा और गुलाब के फूलों को गोलाकार परतों में एक के ऊपर एक सजाकर मंदिर के गुंबद जैसी आकृति छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार की गई। विभिन्न रंगों और किस्मों के फूलों से तैयार की गई आकर्षक पुष्प सज्जा ने उत्सव के वातावरण को विशेष बना दिया। बता दें कि बथुकम्मा तेलंगाना की प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है, जिसमें फूलों को विशेष रूप से सजाकर प्रकृति, मातृशक्ति और सामुदायिक एकता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। यह पर्व महिलाओं की भागीदारी, लोक परंपराओं और प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे संबंध का प्रतीक है। उत्सव के दौरान पारंपरिक बथुकम्मा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकगीतों और संगीत ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। प्रतिभागी छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया। संगीत और लोक परंपराओं से जुड़ी प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को दक्षिण भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से परिचित कराया। कार्यक्रम में उत्सवपूर्ण माहौल के बीच प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से सांस्कृतिक परंपराओं का आनंद लिया। बथुकम्मा सेलिब्रेशन-2026 का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना, विभिन्न क्षेत्रों की लोक कलाओं के प्रति सम्मान विकसित करना और आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर परिसर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना रहा। ऐसे आयोजन छात्र-छात्राओं को अपनी क्षेत्रीय परंपराओं को समझने के साथ-साथ देश की विविधता में एकता की भावना को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि बथुकम्मा उत्सव ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक विरासत को संरक्षित रखना आवश्यक है।