सबसे उत्कृष्ट कार्य पीड़ित मानवता की सेवा : लव दास
शताब्दीपुरम दंदरौआ धाम में श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिन
ग्वालियर। नर सेवा नारायण की सेवा के समान होती है। पीड़ित मानवता की सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है। बी केयर एनजीओ एक ओर पितरों के निमित्त भागवत कराकर मानव कल्याण का कार्य कर रही है, वहीं कथा स्थल पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर पीड़ित मानवता की सेवा भी कर रही है। यह विचार कथा व्यास लव दास महाराज ने शताब्दीपुरम स्थित दंदरौआ धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस मंगलवार को व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सभी की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन आत्मकल्याण के लिए आत्मचिंतन भी जरूरी है। ज्ञानी व्यक्ति सिर्फ एक ही विषय का चिंतन करते हैं और अज्ञानी अनेक विषयों में खोकर मूल उद्देश्य से भटक जाते हैं। मानव जीवन का एक ही उद्देश्य है-भगवत प्राप्ति। मनुष्य के कल्याण के तीन साधन हैं-श्रवण, कीर्तन और मनन। भगवान की कथा सुनने, उनका कीर्तन करने और उनके स्वरूप का दर्शन एवं मनन करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जब मृत्यु निकट आए तो मोह का त्याग कर देना चाहिए। इसके साथ शरीर और परिवार के प्रति आसक्ति का भी त्याग कर देना चाहिए और यह भाव मन में लाना चाहिए कि जब तक भगवान के दर्शन न हो जाएं, तब तक प्राण नहीं छोड़ूंगा। मानव जीवन पाकर जो भगवान का भजन नहीं करते, उनका जीवन व्यर्थ है। ऐसे इंसानों से तो पशु अच्छे हैं, जो किसी के बारे में न तो बुरा बोलते हैं और न बुरा सुनते हैं। बुधवार को कृष्ण जन्मोत्सव की कथा होगी।
इस मौके पर कपिल दास महाराज, कथा परीक्षित साधना राजीव कोठारी, भास्कर शर्मा, सागर नाती सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।