नाम जप से ही होगा मानव का कल्याण: लवदास
शताब्दीपुरम में भागवत के दूसरे दिन शुकदेव आगमन प्रसंग, स्वास्थ्य शिविर में 200 लोगों की जांच
ग्वालियर। शताब्दीपुरम स्थित दंदरौआ धाम मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथा वाचक पं. लवदास महाराज ने कहा कि मनुष्य भगवान का नाम लेना तो चाहता है,लेकिन उम्र निकल जाती है और अंत समय पछतावे के सिवाय कुछ नहीं बचता, इसलिए समय रहते भगवान का नाम सुमरिन शुरू कर दो, उसी से आपका कल्याण होगा। आज मनुष्य के पास 70-80 साल हैं फिर भी वह भगवान का नाम नहीं लेता, जबकि परीक्षित ने सात दिन में मुक्ति पा ली। कलियुग में भागवत ही कल्पवृक्ष है।

उन्होंने शुकदेव आगमन, राजा परीक्षित के जन्म और उन्हें मिले श्राप का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित धर्मात्मा राजा थे। एक बार प्यास से व्याकुल होकर वे शमीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे, ऋषि समाधि में थे तो परीक्षित ने मृत सर्प उनके गले में डाल दिया। ऋषि पुत्र श्रृंगी ने क्रोध में आकर सात दिन में तक्षक नाग द्वारा मृत्यु का श्राप दे दिया। श्राप सुनकर परीक्षित विचलित नहीं हुए, उन्होंने राजपाट त्यागकर गंगा किनारे सात दिन भागवत सुनने का निश्चय किया। उन्होंने बताया कि शुकदेव जी 16 वर्ष की आयु में भी वैरागी थे, उन्हें बुलाया गया और उन्होंने ही परीक्षित को भागवत सुनाई। यहीं से भागवत की शुरुआत हुई। कथा के दौरान - तेरी मंद-मंद मुस्कनिया पे - भजन पर महिलाएं नाच उठीं।
स्वास्थ्य शिविर में जांच....
कथा स्थल पर कथा का संयोजन कर रही वी केयर संस्था ने निशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी लगाया। इसमें बीपी, शुगर, सर्दी-जुकाम के करीब 200 मरीजों की जांच कर निशुल्क दवाएं दी गईं। शिविर में डॉ. की टीम ने लोगों को मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए। इस अवसर पर कथा परीक्षित साधना राजीव कोठारी, भास्कर शर्मा, सागर नाती, संदीप रावत, आराधना दुबे, हरीबाबू करोसिया, एसएन शुक्ला सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।