(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण जिस किशोरवय युवक को दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी, आज वही युवा 15 से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा बन चुका है। इस युवा की दृढ़ इच्छाशक्ति व सरकारी संबल ने आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक इबारत गढ़ दी है।
यह सच्ची कहानी है ग्वालियर जिले की जनपद पंचायत मुरार के ग्राम सौंसा निवासी रविकांत यादव की । उन्होंने यह साबित करके दिखाया है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें तो परिस्थितियाँ बदलते देर नहीं लगती। खेती से जुड़े साधारण परिवार में जन्मे रविकांत के सामने जब आर्थिक चुनौतियाँ आईं, तो उन्होंने हार मानने के बजाय अपने लिए खुद का रोजगार खड़ा करने की ठानी। इसी संकल्प ने उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) तक पहुँचाया। एक ऐसी योजना, जो युवाओं को अपने सपनों को उद्यम में बदलने का अवसर देती है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, ग्वालियर के अधिकारियों के मार्गदर्शन में रविकांत ने सरसों तेल मिल स्थापित करने की योजना बनाई। पीएमईजीपी के तहत उन्हें 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें करीब पौने 9 लाख रुपये का अनुदान शामिल था। इस सहायता से उन्होंने अपने गाँव सौंसा में ही तेल मिल की नींव रखी और मेहनत व लगन से इसे आगे बढ़ाया।
आज नतीजा सबके सामने है। रविकांत की इकाई में 15 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और कई अन्य को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। उनकी मिल का मासिक कारोबार 30 लाख रुपये से अधिक तक पहुँच चुका है। यह सफलता केवल आँकड़ों की नहीं, बल्कि एक युवा के आत्मविश्वास और सतत परिश्रम की कहानी है। “सेवा-संकल्प अभियान” एवं “मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान” के तहत ग्राम सुपावली में आयोजित हुए जिला स्तरीय जन-विश्वास शिविर में रविकांत ने जब अपनी आत्मनिर्भरता का सफर साझा किया तो कार्यक्रम में मौजूद अन्य युवाओं पर इसका गहरा असर पड़ा। युवा बोले कि अब हम भी नौकरी के पीछे पड़ने के बजाय सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर उद्यमी बनेंगे।
रविकांत यादव कहते हैं, "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू की गई पीएमईजीपी योजना ने हम जैसे युवाओं के लिए उद्यम शुरू करने का रास्ता आसान बना दिया है। मुझे खुशी है कि मेरे उद्योग से दूसरों को भी रोजगार मिल रहा है।" वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि दोनों सरकारों की योजनाएँ सही मायने में "विकसित भारत" की संकल्पना को साकार कर रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से इन्हीं योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास हो रहा है। निश्चित ही इससे रविकांत जैसे कई नए उद्यमी उभरकर सामने आयेंगे।